देव भूमि जे के न्यूज,(जय कुमार तिवारी)ऋषिकेश, 4 नवंबर।** श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन एवं आपदा रोधी पर्यटन को लेकर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन CEDRT-2026 का समापन हो गया। विश्वविद्यालय के IQAC, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण टिहरी गढ़वाल, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय भारत सरकार एवं यूकॉस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन का विषय “जलवायु परिवर्तन और आपदा रोधी पर्यटन के लिए डिजिटल एजेंडा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता” रहा।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उत्तराखंड में धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं के साथ आपदा प्रबंधन की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुरक्षित, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी तैयारियां विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सामने आए शोध निष्कर्ष और महत्वपूर्ण सुझाव प्रदेश सरकार के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे तथा पर्यटन विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन की नीतियों को नई दिशा देंगे।
कुलपति प्रो. अंबरीश कुमार महाजन ने कहा कि सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र और विचार सतत पर्यटन विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के निष्कर्ष प्रदेश सरकार की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में उपयोगी साबित होंगे।
परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत ने अतिथियों, वक्ताओं, शोधकर्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा ने सम्मेलन के उद्देश्यों एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सतत पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर शैक्षणिक विमर्श एवं शोध को प्रोत्साहित करना था। उन्होंने मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का विशेष आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में लगभग 80 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की के प्रो. एल.एन. ठुकराल ने जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों में बढ़ते तापमान और कम होते स्नो कवर का उल्लेख किया। उन्होंने ग्लेशियल लेक के विस्तार, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की निगरानी तथा मैपिंग टूल्स की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. दीपिका यजुर्वेदी ने ग्रीन केमिस्ट्री टूरिज्म पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। भूतपूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.पी. माहेश्वरी ने “उत्तराखंड में अनुभवात्मक पर्यटन : देवभूमि पर्यटन में बदलाव लाने में संवर्धित एवं आभासी वास्तविकता तकनीक (AR/VR) की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
भरसार स्थित उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एस.पी. सती ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का हिमालयी वनस्पतियों एवं विभिन्न फसलों के जीवन चक्र पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बुरांश का उदाहरण देते हुए इसके प्राकृतिक प्रभावों की जानकारी दी।
पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. वी.डी. पांडे ने “सांस्कृतिक विरासत संरचनाओं पर सायनोबैक्टीरिया का प्रभाव” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ऐतिहासिक स्मारकों एवं विरासत स्थलों को सायनोबैक्टीरिया से होने वाले नुकसान और उनके संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक संरक्षण उपायों की आवश्यकता बताई।
प्रो. डी.सी. गोस्वामी ने गढ़वाल हिमालय में सतत एवं जिम्मेदार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने हिमालयी पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, तीर्थयात्रियों की संख्या का नियमन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को आवश्यक बताया। साथ ही चारधाम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन विकसित करने का संदेश दिया।
प्रो. वी.पी. श्रीवास्तव ने “बियॉन्ड ट्रेडिशनल टूरिज्म” विषय पर अपने विचार रखते हुए पारंपरिक पर्यटन से आगे नए अवसरों, नवाचार, सतत विकास तथा स्थानीय संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रीति खंडूरी एवं डॉ. हेमंत बिष्ट ने किया। आयोजन में डॉ. सीमा बेनीवाल, डॉ. गौरव वाष्णेय, डॉ. राकेश जोशी एवं डॉ. संजय महर का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर डीन विज्ञान प्रो. एस.पी. सती, डीन कला प्रो. पी.के. सिंह, डीन वाणिज्य प्रो. विजय श्रीवास्तव, चीफ प्रॉक्टर प्रो. धर्मेंद्र तिवारी, डीन छात्र कल्याण प्रो. हेमलता मिश्रा, प्रो. वी.डी. पांडे, प्रो. संगीता मिश्रा, प्रो. अधीर कुमार, प्रो. पुष्पांजलि आर्य, प्रो. दीपा शर्मा, प्रो. सुरमान, प्रो. वी.के. गुप्ता, प्रो. सी.एस. नेगी, डॉ. शालिनी रावत सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।







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