उत्तराखंड

डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर बने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के नए कुलपति।

देव भूमि जे के न्यूज,डोईवाला, 22 सितंबर 2026। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट को नए कुलपति के रूप में डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर का नेतृत्व मिला है।…

डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर बने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के नए कुलपति।

देव भूमि जे के न्यूज,डोईवाला, 22 सितंबर 2026। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट को नए कुलपति के रूप में डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर का नेतृत्व मिला है। डॉ. वाडेगावकर ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। निवर्तमान कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने उन्हें कुलपति का कार्यभार सौंपा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर स्थित आदि-कैलाश सभागार में स्वागत एवं कार्यभार ग्रहण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवनियुक्त कुलपति का स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

समारोह में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर का स्वागत करते हुए कहा कि उनके व्यापक शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक अनुभव से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय को नई दिशा और नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. वाडेगावकर को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में संस्थान शोध, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।

डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर को उद्योग, शिक्षण, अनुसंधान और अकादमिक प्रशासन के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय में प्रो-वाइस चांसलर के साथ-साथ जैव प्रौद्योगिकी विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा यूजीसी-ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। अपने अकादमिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा, शोध एवं संस्थागत विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दिया है।

डॉ. वाडेगावकर ने डीबीटी, डीएसटी, यूजीसी और डीआरडीओ जैसी प्रमुख संस्थाओं द्वारा समर्थित शोध एवं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का नेतृत्व भी किया है। उनके अनुभव का दायरा जैव प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, उच्च शिक्षा, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा अकादमिक प्रशासन तक विस्तृत है।

कुलपति के रूप में डॉ. वाडेगावकर की प्राथमिकताओं में एसआरएचयू को और अधिक शोध-केंद्रित, बहुविषयक तथा सामाजिक रूप से जिम्मेदार विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करना शामिल है। वे चिकित्सा, फार्मास्युटिकल साइंसेज और एसटीईएम विषयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ ट्रांसलेशनल रिसर्च, उद्योग-अकादमिक सहयोग, शोध आधारित उद्यमिता और फैकल्टी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उसे शोध, नवाचार, व्यावहारिक अनुभव और सामाजिक जरूरतों से जोड़ना आवश्यक है। विद्यार्थियों को उद्योग एवं क्लिनिकल एक्सपोजर, शोध परियोजनाओं, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सीखने तथा प्रयोग करने के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

शिक्षा को शोध और नवाचार से जोड़ना प्राथमिकता- डॉ. वाडेगावकर

कुलपति का कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर ने कहा कि गुरुदेव डॉ. स्वामी राम की दूरदर्शी सोच से प्रेरित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पेशेवर रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध और समाज के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें वे ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ उसे व्यवहारिक जीवन में लागू कर सकें। शोध, व्यावहारिक अनुभव, उद्योग एवं क्लिनिकल एक्सपोजर, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।

डॉ. वाडेगावकर ने कहा कि उनका लक्ष्य एसआरएचयू को ऐसा शोध-केंद्रित और बहुविषयक विश्वविद्यालय बनाना है, जहां ज्ञान का सृजन समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में होने वाला शोध केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ समाज और आम लोगों तक पहुंचे, इस दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर निवर्तमान कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने अपने विदाई संबोधन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रेरित करते हुए कहा, “आप बड़ा सपना देखें, सफलता और भी बड़ी होगी।” उन्होंने कहा कि एसआरएचयू जिस तेजी से रिसर्च एवं डेवलपमेंट के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, उस गति को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

डॉ. डोभाल ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आधार बनाकर निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध, चिकित्सा एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने डॉ. राजेंद्र डोभाल के कार्यकाल की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उनके योगदान को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. डोभाल के नेतृत्व में संस्थान के रिसर्च पोर्टफोलियो में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। इसी अवधि में विश्वविद्यालय ने नैक ए+ ग्रेड हासिल किया तथा एनआईआरएफ और क्यूएस आई-गेज जैसी रैंकिंग व्यवस्थाओं में भी उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया।

डॉ. धस्माणा ने डॉ. डोभाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विकास में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने भविष्य में भी विश्वविद्यालय के विकास और शैक्षणिक उन्नति के लिए उनके साथ निरंतर सहभागिता की उम्मीद जताई।

कार्यभार ग्रहण एवं स्वागत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने नए कुलपति डॉ. प्रसाद ए. वाडेगावकर का अभिनंदन किया और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। नए नेतृत्व के साथ एसआरएचयू में शोध, नवाचार, बहुविषयक शिक्षा, उद्योग-अकादमिक सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्रों में नए प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई।

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