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बाढ़ के दर्द के बीच आस्था और उम्मीद की पुकार है ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’

देवभूमि जे के न्यूज, मुंबई, 7 अक्टूबर 2026। बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच आम जनजीवन की पीड़ा और आस्था को स्वर देता भोजपुरी गीत ‘बाढ़ में…

बाढ़ के दर्द के बीच आस्था और उम्मीद की पुकार है ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’

देवभूमि जे के न्यूज, मुंबई, 7 अक्टूबर 2026। बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच आम जनजीवन की पीड़ा और आस्था को स्वर देता भोजपुरी गीत ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’ रिलीज हो गया है। लोकप्रिय अभिनेत्री-गायिका अक्षरा सिंह की भावपूर्ण आवाज में यह गीत विपदा की घड़ी में उम्मीद, विश्वास और प्रार्थना की आवाज बनकर सामने आया है।

गीत के रचनाकार मनोज भावुक ने बाढ़ से प्रभावित घर-परिवार, खेत-खलिहान और आम लोगों की व्यथा को बेहद सहज और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त किया है। गीत में दुर्गा मइया और छठी मइया से बिहार की नैया पार लगाने की प्रार्थना है। मधुकर आनंद ने गीत की संवेदना के अनुरूप करुणा और उम्मीद से भरा संगीत दिया है।

अक्षरा सिंह ने अपनी सशक्त और भावपूर्ण गायकी से गीत के दर्द और प्रार्थना को गहराई दी है। खास बात यह है कि बाढ़ के दौरान वह स्वयं बिहार पहुंचकर पीड़ितों की मदद में जुटी थीं। बिहार के लोगों की तकलीफ को करीब से महसूस कर चुकीं अक्षरा की आवाज में इस गीत की संवेदना और भी आत्मीय हो उठी है।

भोजपुरी साहित्य और संस्कृति के सजग हस्ताक्षर मनोज भावुक इससे पहले भी ‘पलायन के दर्द, सुनs ए छठी मइया’ और ‘जागे यूपी-बिहार’ जैसे गीतों के जरिए सामाजिक सरोकारों को स्वर दे चुके हैं। ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार’ भी उनकी इसी रचनात्मक संवेदना का विस्तार है।

गीत में बाढ़ की विभीषिका के बीच बिहार के लोगों की पीड़ा के साथ यह भरोसा भी है कि कठिन समय गुजर जाएगा और उम्मीद की नाव किनारे लगेगी।

गीत सुनें:

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