उत्तराखंड

*ऋषिकेश- श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में 55 करोड़ से विकसित होंगे छह नए विभाग, 314 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव मंजूर*

देव भूमि जे के न्यूज (जय कुमार तिवारी)ऋषिकेश, 30 अक्टूबर। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की 17वीं शैक्षिक परिषद की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर,…

देव भूमि जे के न्यूज (जय कुमार तिवारी)ऋषिकेश, 30 अक्टूबर। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की 17वीं शैक्षिक परिषद की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में कुलपति प्रो. ए.के. महाजन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। नवनियुक्त कुलपति के कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय में यह पहली शैक्षिक परिषद की बैठक थी। बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित करने, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक के शुभारंभ पर परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत ने कुलपति प्रो. ए.के. महाजन को शॉल भेंट कर स्वागत किया। वहीं अन्य प्राध्यापकों ने पौधे भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद कुलसचिव एवं शैक्षिक परिषद के सचिव दिनेश चंद्रा ने बैठक के एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। परिषद के सदस्यों ने प्रत्येक प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णयों को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की।

बैठक में विश्वविद्यालय की 16वीं शैक्षिक परिषद की कार्यवाही, परीक्षा समिति के निर्णयों, शैक्षणिक कैलेंडर तथा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश विवरणिका का अनुमोदन किया गया। छात्र संघ संविधान के व्यावहारिक संचालन में सामने आ रही कठिनाइयों और आवश्यक संशोधनों की समीक्षा के लिए विशेष समिति गठित करने को भी स्वीकृति दी गई।

एआई और आधुनिक तकनीक आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा

विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को वर्तमान रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी गई। CRIS DAN LABS, देहरादून के सहयोग से जीनोमिक्स डेटा, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लिनिकल रिसर्च और फार्माकोविजिलेंस जैसे विषयों में क्रेडिट आधारित एवं व्यावहारिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

इसके साथ ही स्नातक स्तर पर NASSCOM द्वारा तैयार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इन पाठ्यक्रमों से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

55 करोड़ की लागत से छह नए विभागों का निर्माण

विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से छह नए विभागों के निर्माण की योजना को मंजूरी दी गई। इनमें टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट, एआई एंड डेटा साइंस, रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस, एमएससी बायोकेमिस्ट्री, योग एवं वेलनेस तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित विभाग शामिल हैं।

इन विभागों की स्थापना से विश्वविद्यालय में आधुनिक विषयों के अध्ययन और शोध को बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से पर्यटन, तकनीक, योग, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए नए शैक्षणिक अवसर विकसित होंगे।

314 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा

विश्वविद्यालय से संबद्ध 230 महाविद्यालयों और लगभग एक लाख छात्र-छात्राओं से जुड़े प्रशासनिक एवं परीक्षा संबंधी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 256 नए गैर-शिक्षण पदों के सृजन का प्रस्ताव शासन को भेजने का अनुमोदन किया गया।

इसके अतिरिक्त ऋषिकेश परिसर में शिक्षकों की कमी दूर करने के उद्देश्य से 11 विषयों में 58 नए शिक्षण पदों के सृजन का प्रस्ताव भी शासन को भेजा जाएगा। इन पदों के सृजन से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय शोध और डिजिटल शिक्षा पर जोर

बैठक में उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग को प्रोत्साहित करने के लिए SWAYAM और SWAYAM PLUS प्लेटफॉर्म अपनाने को भी मंजूरी दी गई। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री और अतिरिक्त कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।

इसके अलावा भूगर्भ विज्ञान विभाग के अंतर्गत अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी की प्रो. टीना एम. नीमी के साथ संयुक्त पेलियोसीस्मोलॉजी अनुसंधान एवं छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध सहयोग और विद्यार्थियों के शैक्षणिक अनुभवों को विस्तार मिलने की संभावना है।

बैठक में कुलसचिव एवं शैक्षिक परिषद सचिव दिनेश चंद्रा, परिसर निदेशक प्रो. एम.एस. रावत, प्रो. स्वाती नेगी, परीक्षा नियंत्रक मनोज पांडेय, मुख्य वित्त अधिकारी, नैखरी एवं चंद्रबदनी विश्वविद्यालय परिसरों के निदेशक, कला संकायाध्यक्ष प्रो. पी.के. सिंह, वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. वी.के. श्रीवास्तव, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. एस.पी. सती, डॉ. हेमलता मिश्रा, प्रो. बी.एन. शर्मा, प्रो. डी.एस. नेगी, प्रो. माधुरी, प्रो. एस.के. बत्रा सहित विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में कुलसचिव दिनेश चंद्रा ने कुलपति सहित सभी सदस्यों एवं उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और बैठक के समापन की घोषणा की।

विश्वविद्यालय की इस बैठक में लिए गए निर्णयों को उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण, शोध गतिविधियों के विस्तार और युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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