देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश, 30 अक्टूबर। राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के मुख्य सभागार में ‘शक्ति समागम : सृजन से समृद्धि’ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लखपति दीदियों ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह आज केवल बचत और आर्थिक लेनदेन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि महिला आत्मविश्वास, वित्तीय स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन चुके हैं। महिलाओं ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर सफलता की नई कहानियां लिखी हैं।
उन्होंने उत्तराखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग 22 हजार समूहों से जुड़ी 2.5 लाख से अधिक महिलाओं ने 300 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण का उपयोग कर वित्तीय अनुशासन और उद्यमिता की मिसाल पेश की है। यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी है।
राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष ने वर्ष 2030 तक देश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सभी से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने सभागार में मौजूद महिलाओं को बाल विवाह की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा, सम्मान और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विजया रहाटकर ने स्वयं सहायता समूहों को केवल बचत समूहों तक सीमित न रखने की आवश्यकता बताते हुए इन्हें जागरूकता और अधिकारों से जुड़े ज्ञान समूहों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को साइबर सुरक्षा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून (पॉश), घरेलू हिंसा से संरक्षण और पोषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी देने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि पर्वतीय राज्य की महिलाएं अपनी मेहनत, साहस और संघर्षशीलता के लिए पहचानी जाती हैं। राज्य महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत बनाने तथा उनके स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण से लेकर उसके विकास तक नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और लखपति दीदी योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिले हैं।
नगर निगम ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान ने महिला सशक्तिकरण को समाज के समग्र विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। वहीं एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह ने महिला स्वास्थ्य, जागरूकता और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित महिलाओं ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने तथा समाज के समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के उप निदेशक रामावतार सिंह, राज्यमंत्री चारु कोठारी, प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष रुचि भट्ट, तुलसी मेहरा, रेखा रयाल, उर्वशी चौहान, कृतिका दबई, गुनिता सहित अनेक गणमान्य महिलाएं एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संवाद और जागरूकता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण तथा बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण का संदेश दिया गया।







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