ऋषिकेश, 19 अक्टूबर। ऋषिकेश-
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) कर्मचारियों का अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल जारी है। ऑल SC & ST एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के संबंध में एसोसिएशन ने आज एक प्रेस वार्ता कर पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया गया कि भूख हड़ताल के तीसरे दिन तक संस्थान प्रशासन की ओर से आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ वार्ता की पहल नहीं की गई है। कर्मचारियों ने पदोन्नति में आरक्षण के नियमानुसार अनुपालन, विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई है।
एसोसिएशन के अनुसार, कर्मचारियों का यह आंदोलन 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित DPC प्रक्रिया और उससे संबंधित आदेशों को लेकर व्याप्त असंतोष के बाद तेज हुआ है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर, Own Merit यानी स्वयं की योग्यता के आधार पर चयन से संबंधित सिद्धांतों तथा केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और सक्षम प्राधिकरणों द्वारा जारी लागू दिशा-निर्देशों का नियमानुसार पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान करने की मांग की है।
**चार कर्मचारी भूख हड़ताल पर, नर्सिंग यूनियन ने भी समर्थन जताया**
एसोसिएशन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों में लोकेंद्र सिंह मीणा, दिनेश राठौर, दर्शन कुमार और युधिष्ठिर मीणा शामिल हैं। एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य संस्थान में पदोन्नति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों को नियमों के अनुरूप न्याय दिलाना है।
इसी क्रम में नर्सिंग यूनियन NPDA के महासचिव चंद्रभान ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए 19 अक्टूबर की शाम छह बजे से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। एसोसिएशन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि SC/ST कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो उत्पन्न होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी AIIMS प्रशासन की होगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद भूख हड़ताल में उनकी वास्तविक भागीदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
**10 अक्टूबर की DPC प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग**
आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख आपत्ति 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया और उससे जुड़े आदेशों को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों के बीच इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर असंतोष है और संबंधित तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। संगठन ने मांग की है कि पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर और Own Merit के सिद्धांत का लागू नियमों के अनुसार पालन किया जाए।
इसके साथ ही एसोसिएशन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के लागू दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि पदोन्नति से जुड़े निर्णयों में नियमों की स्पष्टता, पारदर्शिता और समान अवसरों के सिद्धांत का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय की आशंका न रहे।
**भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायतों की जांच की मांग**
एसोसिएशन ने SC/ST कर्मचारियों की ओर से उठाई गई शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी ने भेदभाव, उत्पीड़न अथवा नियमों के उल्लंघन से संबंधित शिकायत की है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष या किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं है। संगठन इसे संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और आरक्षण संबंधी अधिकारों की रक्षा से जुड़ा विषय बता रहा है। संगठन का कहना है कि संस्थान में ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सभी कर्मचारियों को नियमानुसार अवसर मिले और शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण किया जाए।
**एसोसिएशन की सात प्रमुख मांगें**
ऑल SC & ST एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन ने AIIMS ऋषिकेश प्रशासन के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 10 अक्टूबर 2026 की DPC प्रक्रिया और उससे संबंधित आदेशों की निष्पक्ष समीक्षा, पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर एवं Own Merit के सिद्धांत का नियमानुसार अनुपालन तथा MoHFW, DoPT, NCST और NCSC के लागू दिशा-निर्देशों का पालन शामिल है।
इसके अतिरिक्त, SC/ST कर्मचारियों की शिकायतों और भेदभाव अथवा उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों, गरिमा और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने तथा भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से तत्काल वार्ता शुरू कर समयबद्ध समाधान निकालने का भी आग्रह किया है।
**प्रशासन से तत्काल संवाद शुरू करने की अपील**
एसोसिएशन ने प्रशासन से अपील की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ तत्काल वार्ता की जाए। संगठन का कहना है कि भूख हड़ताल का लगातार जारी रहना और संवाद की पहल नहीं होना चिंताजनक है। कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल किए जाने से संस्थान में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है।
एसोसिएशन ने कहा है कि जब तक कर्मचारियों की मांगों पर न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होती, तब तक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा। संगठन ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता, आरक्षण संबंधी नियमों का अनुपालन और कर्मचारियों की शिकायतों का निष्पक्ष समाधान है।
फिलहाल, इस मामले में AIIMS ऋषिकेश प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले के दूसरे पक्ष और उठाए गए आरोपों पर उसकी स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
आंदोलनरत कर्मचारियों का संदेश है कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, पदोन्नति में न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संवाद एवं नियमसम्मत समाधान जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब वार्ता शुरू करता है और कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
“संविधान हमारा अधिकार है, समानता हमारी पहचान है और न्याय हमारा संकल्प है।”









0 Comments