देवभूमि जे के न्यूज,हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित लंकेश्वरी में एक आयुर्वेदिक औषधि निर्माण इकाई का मंगलवार को संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। प्राप्त गोपनीय सूचना और शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में दो प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई। साथ ही, जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित औषधियों के शेष स्टॉक को नियमानुसार सीलबंद कर दिया गया। अधिकारियों ने इकाई प्रबंधन को औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
यह कार्रवाई राज्य औषधि अनुज्ञापन अधिकारी, उत्तराखंड डॉ. मिथिलेश कुमार के पत्र तथा निदेशक आयुष, देहरादून को प्राप्त सूचना के क्रम में राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी के निर्देश पर की गई। निरीक्षण का उद्देश्य औषधि निर्माण प्रक्रिया, उपलब्ध दस्तावेजों, लाइसेंस और गुणवत्ता संबंधी व्यवस्थाओं की जांच करना था, ताकि औषधियों की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी एवं औषधि निरीक्षक (आयुर्वेद) डॉ. स्वास्तिक सुरेश के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने औषधि निर्माण इकाई पहुंचकर उपलब्ध अभिलेखों, निर्माण लाइसेंस और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। पंचनामे के अनुसार, कंपनी के प्रतिनिधि की उपस्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के दौरान शिकायतों के आधार पर इकाई में निर्मित दो प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों के नमूने निर्धारित प्रक्रिया के तहत एकत्र किए गए। नमूना संग्रहण से संबंधित आवश्यक प्रपत्रों की कार्रवाई पूरी की गई तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नमूनों के संबंधित भाग कंपनी के प्रतिनिधि को भी उपलब्ध कराए गए। औषधियों की गुणवत्ता की पुष्टि के लिए नमूनों को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, हरिद्वार भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई है।
सीलबंद स्टॉक में सिरप की 374 बोतलें और ऑयल की 20 शीशियां
निरीक्षण के दौरान तैयार किए गए पंचनामे में दर्ज विवरण के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने तक सीलबंद किए गए स्टॉक में सिरप की पांच पेटियों में कुल 300 बोतलें, एक अन्य पेटी में 74 बोतलें और ऑयल की 20 शीशियां शामिल हैं। इस प्रकार संबंधित विवरण में सिरप की कुल 374 बोतलों और ऑयल की 20 शीशियों का उल्लेख है। औषधियों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच पूरी होने और रिपोर्ट प्राप्त होने तक संबंधित स्टॉक को सीलबंद रखा गया है।
संयुक्त निरीक्षण टीम में डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय, विशेषज्ञ औषधि निर्माण, डॉ. भास्कर आनंद शर्मा, चिकित्साधिकारी, राम मूरत, कार्यालय सहायक, एएनटीएफ के उप निरीक्षक दीपक मैठाणी, औषधि निरीक्षक डॉ. विनोद जगूड़ी, कांस्टेबल प्रदीप, कांस्टेबल प्रशान्त चौहान सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
GMP मानकों के पालन पर जोर
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने औषधि निर्माण इकाई के प्रबंधन को गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) के निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। औषधि निर्माण की प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, अभिलेखों के उचित रखरखाव और संबंधित नियामकीय प्रावधानों के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया।
औषधि निरीक्षक डॉ. विनोद जगूड़ी और आयुर्वेद विधि विशेषज्ञ डॉ. भास्कर आनंद ने प्रबंधन को निर्देशित किया कि औषधि निर्माण से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जाएं। औषधियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक सावधानियों और नियामकीय नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य है।
वहीं, विशेषज्ञ औषधि निर्माण डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों की शुद्धता, गुणवत्ता और मानकीकरण जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। औषधि निर्माण इकाइयों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियों का निर्माण सुनिश्चित करना चाहिए।
प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
संयुक्त टीम ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक औषधि निर्माण इकाइयों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों और संबंधित नियमों के अनुपालन की जांच के लिए निरीक्षण अभियान जारी रहेगा। संबंधित औषधियों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसके निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, नमूनों की जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित औषधियों का शेष स्टॉक सीलबंद रखा गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से ही औषधियों की गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।







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