देव भूमि जे के न्यूज़ –
दीपावली का पर्व आते ही हर घर में साफ-सफाई, सजावट और दीप प्रज्वलित करने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मान्यता है कि दीपावली की रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर एवं सकारात्मक वातावरण वाले घरों में प्रवेश करती हैं। लेकिन क्या मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए केवल घर को सजाना और दीपक जलाना ही पर्याप्त है? महाभारत के शांतिपर्व में वर्णित एक प्रेरक प्रसंग हमें इसका गहरा उत्तर देता है।
पौराणिक प्रसंग के अनुसार, एक दिन मां लक्ष्मी देवराज इंद्र के द्वार पर पहुंचीं और बोलीं कि वे अब उनके यहां निवास करना चाहती हैं। इंद्र ने आश्चर्य से पूछा कि देवी! आप तो असुरों के यहां बड़े आनंदपूर्वक रहती थीं, फिर आज बिना बुलाए मेरे द्वार पर कैसे पधारी हैं? इसका कारण समझाइए।
मां लक्ष्मी ने बताया कि एक समय असुर बड़े धर्मात्मा, कर्तव्यपरायण और सद्गुणों से युक्त थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके आचरण में बदलाव आने लगा। उनके परिवारों में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और कलह ने जगह बना ली। बड़ों का सम्मान समाप्त होने लगा। युवा माता-पिता का अनादर करने लगे और शिष्य अपने आचार्यों का अपमान करने लगे। समाज की मर्यादाएं टूटने लगीं।
असुरों ने दान, सेवा और परोपकार छोड़कर धन का उपयोग केवल विलासिता और ऐशो-आराम में करना शुरू कर दिया। परिवार के प्रति जिम्मेदारियां कम होने लगीं। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति भी उनका व्यवहार अनुचित हो गया। वे हरे-भरे वृक्षों को काटने लगे और अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने लगे।
मां लक्ष्मी ने आगे बताया कि उनके घरों में पापाचार, स्वार्थ और पक्षपात बढ़ गया था। मदिरापान, जुआ और अनैतिक आचरण को बढ़ावा मिलने लगा। यह सब देखकर उन्होंने असुरों का साथ छोड़ने का निर्णय लिया।
इंद्र ने मां लक्ष्मी से पूछा कि देवी! फिर आप किन लोगों के घर में निवास करती हैं?
मां लक्ष्मी ने उत्तर दिया कि मैं परिश्रमी, मितव्ययी, जागरूक और नियमित रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले लोगों के घर में निवास करती हूं। जहां सत्य, धर्म, दान, विनम्रता, सदाचार और बड़ों का सम्मान होता है, वहां मेरा वास रहता है। जहां परिवार में प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव होता है, वहां मैं प्रसन्नतापूर्वक निवास करती हूं।
मां लक्ष्मी का यह संदेश केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला भी सिखाता है।
**दीपावली पर हमें क्या संकल्प लेना चाहिए?**
इस दीपावली हम अपने घरों में दीपक जलाने के साथ-साथ मन के अंधकार को भी दूर करने का संकल्प लें। ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, अहंकार और स्वार्थ को त्यागकर प्रेम, सद्भाव, सत्य और सदाचार को अपनाएं। माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें, जरूरतमंदों की सहायता करें, धन का सदुपयोग करें और अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहें।
याद रखिए, घर की सुंदरता केवल महंगे सामान और रोशनी से नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के अच्छे व्यवहार और संस्कारों से होती है।
महाभारत के शांतिपर्व का यह प्रसंग हमें सिखाता है कि मां लक्ष्मी को घर बुलाने के लिए केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अपने आचरण को भी पवित्र बनाना आवश्यक है।
**इस दीपावली घर में दीपक के साथ संस्कारों का उजाला भी जलाएं, क्योंकि जहां सदाचार और सद्भाव होता है, वहीं सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।**
सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
— देवभूमि जेके न्यूज



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