देव भूमि जे के न्यूज,रायवाला, 04 नवंबर 2026। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, श्रीरामलीला चौक, वार्ड नंबर 06, प्रतीतनगर में लोक कल्याण समिति, प्रतीतनगर, रायवाला (पंजीकृत) की ओर से आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव में मंगलवार को पाताल लीला, अहिरावण वध, रावण वध तथा माता सीता की वापसी सहित चार प्रमुख प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला मैदान जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा।
श्रीरामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि मंगलवार की लीला में सर्वप्रथम रावण के पुत्रों और भाइयों की मृत्यु से व्याकुल रावण का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मंदोदरी रावण को उसके अहंकार, जिद और परस्त्री के प्रति मोह को परिवार के विनाश का कारण बताती है। इसके बाद रावण पाताल लोक में रहने वाले अहिरावण को लंका बुलाकर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का वध करने का आदेश देता है।
अहिरावण छलपूर्वक भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले जाकर उनकी बलि देने की तैयारी करता है। प्रभु के अचानक गायब होने पर हनुमान जी उनकी तलाश में निकल पड़ते हैं। पाताल लोक पहुंचने पर उनका सामना मकरध्वज से होता है। दोनों के बीच युद्ध के बाद मकरध्वज स्वयं को हनुमान जी का पुत्र बताता है। इसके पश्चात हनुमान जी अहिरावण का वध कर श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराते हैं। वह पाताल लोक का राज मकरध्वज को सौंपकर दोनों को अपने कंधों पर बैठाकर रामदल में वापस ले आते हैं। इस प्रसंग पर दर्शकों ने जय श्रीराम और जय बजरंगबली के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
**श्रीराम और रावण के बीच महासंग्राम का रोमांचक मंचन**
इसके बाद राम-रावण युद्ध का मंचन किया गया। रावण जब युद्धभूमि में जाने के लिए तैयार होता है तो मंदोदरी और अन्य योद्धा उसे रोकने का प्रयास करते हैं, लेकिन वह किसी की बात नहीं मानता। युद्धभूमि में रावण के विशाल रथ और उसकी युद्ध तैयारियों को देखकर विभीषण चिंतित हो जाते हैं। वह भगवान श्रीराम से कहते हैं कि रावण कवच धारण कर रथ पर सवार है, जबकि प्रभु श्रीराम के पास न तो रथ है और न ही कवच।
इस पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम विभीषण को समझाते हुए बताते हैं कि विजय के लिए लकड़ी और लोहे से बने रथ की आवश्यकता नहीं होती। मनुष्य के वास्तविक विजय रथ के पहिये शौर्य और धैर्य हैं। सत्य और शील उसकी ध्वजा हैं, जबकि बल, विवेक, दम और परोपकार उसके घोड़े हैं। क्षमा, दया और समता की डोर से ये घोड़े जुड़े होते हैं। ईश्वर भजन उस रथ का सारथी और गुरुजनों का सम्मान उसका अभेद्य कवच है। धर्ममय रथ पर सवार व्यक्ति अजेय शत्रु को भी परास्त कर सकता है।
युद्ध के दौरान रावण वानर सेना पर भारी पड़ता है। हनुमान, अंगद और सुग्रीव भी उसे रोकने का प्रयास करते हैं। लक्ष्मण भी रावण से युद्ध करते हैं। इसी बीच रावण की दृष्टि विभीषण पर पड़ती है और वह उन्हें कुलद्रोही कहकर शक्ति का प्रहार करता है। विभीषण को बचाने के लिए श्रीराम स्वयं उस शक्ति प्रहार को अपने वक्ष पर झेल लेते हैं। यह देखकर हनुमान, सुग्रीव और जामवंत रावण पर हमला कर देते हैं, जिससे वह मूर्छित हो जाता है। रावण का सारथी उसे युद्धभूमि से बाहर ले जाता है।
होश में आने के बाद रावण पुनः युद्धभूमि में लौटता है। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच फिर से भीषण संग्राम होता है। दोनों ओर से दिव्यास्त्रों का प्रयोग किया जाता है। सूर्यास्त होने पर युद्ध विराम होता है और अगले दिन फिर युद्ध करने की घोषणा की जाती है।
**श्रीराम ने नाभि का अमृत सुखाकर किया रावण का वध**
अगले दिन युद्धभूमि में श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध शुरू होता है। इसी दौरान विभीषण भगवान श्रीराम को बताते हैं कि ब्रह्मा जी के वरदान के कारण रावण की नाभि में अमृत है और इसी वजह से उसका अंत करना कठिन है। विभीषण की बात सुनकर श्रीराम रावण की नाभि पर बाण चलाकर अमृत को सुखा देते हैं और इसके बाद अपने दिव्य बाण से रावण का वध कर देते हैं। मृत्यु के समय रावण के मुख से भी श्रीराम का नाम निकलता है। रावण वध के दृश्य के दौरान पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
इसके बाद माता सीता की वापसी का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव और विभीषण के साथ अयोध्या लौटते हैं। सबसे पहले वह भरत से मिलकर अपना वचन पूरा करते हैं। चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण होने पर भगवान श्रीराम अपनी जन्मभूमि अयोध्या पहुंचकर माताओं और भाइयों से मिलते हैं। इस भावुक दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
**अतिथियों को राम दरबार की माला एवं स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित**
कार्यक्रम के दौरान लोक कल्याण समिति की ओर से मुख्य अतिथि अभियंता पी.सी. ध्यानी, प्रबंध निदेशक पिटकुल एवं यूपीसीएल, उत्तराखंड के प्रतिनिधि अधीक्षण अभियंता विजय कुमार सिंह, एसडीओ ऋषिकेश उदित, संपादक ‘गढ़वाल की पीड़ा’ अनिल रावत, जिला पंचायत सदस्य हरिपुर कलां दिव्या बेलवाल, जिला पंचायत सदस्य साहब नगर, रायवाला के प्रतिनिधि हिमांशु पंवार, प्रधानाचार्या मंजु थपलियाल, उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश सचिव भगवती प्रसाद सेमवाल, श्री राधा कृष्ण पब्लिक स्कूल की अध्यापिकाओं, गौरव नेगी (वन परिक्षेत्र अधिकारी) के प्रतिनिधि आशीष गौड़ (वनपाल-वन दरोगा), कर्ण बहादुर (बचावकर्ता), श्री आदर्श रामलीला कमेटी बड़ासी, रायपुर देहरादून, रायवाला एवं प्रतीतनगर की कीर्तन मंडलियों तथा बीडीसी रायवाला लक्ष्मी जीत सिंह रावत सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को राम दरबार की माला एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने लोक कल्याण समिति को भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए भविष्य के कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं दीं।
**कलाकारों के शानदार अभिनय ने मोहा दर्शकों का मन**
रामलीला मंचन के दौरान श्रीराम की भूमिका में सौरभ चमोली, लक्ष्मण की भूमिका में चन्द्रमणि शर्मा, हनुमान की भूमिका में आशीष सेमवाल, रावण की भूमिका में सचिन गौड़, मंदोदरी की भूमिका में राहुल कोहली, अहिरावण की भूमिका में रमेश जोशी, मकरध्वज की भूमिका में दीपक जोशी तथा मलयवान की भूमिका में सिकंदर ने शानदार अभिनय किया। वहीं माता कामदा की भूमिका में रज्जो सहित अन्य कलाकारों ने भी अपने प्रभावशाली अभिनय से खूब वाहवाही लूटी। कलाकारों की शानदार संवाद अदायगी और सजीव अभिनय पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर श्रीरामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू), मुख्य एवं वरिष्ठ निर्देशक महेंद्र सिंह राणा, अध्यक्ष गंगाधर गौड़, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी, सदस्य नवीन चमोली, आशीष सेमवाल, राजेंद्र प्रसाद तिवाड़ी, रोहित धमाका, सन्नी, जगदीश सिंह एवं नितीश चमोली सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
संगीत पक्ष में तबले पर कमल रामानुज, हारमोनियम पर पूरन चंद तथा ऑक्टोपैड पर कुनाल शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु एवं रामभक्त मौजूद रहे।







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