उत्तराखंड

सीएम धामी ने पांच साल की उपलब्धियों पर बने एल्बम गीत का किया विमोचन, पंचवटी फिल्म्स और आदर्श संस्था के कलाकारों को किया सम्मानित

देहरादून, 26 अगस्त 2026 — देवभूमि जेके न्यूज़ डेस्क मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में एक विशेष एल्बम गीत का विमोचन किया, जो…

सीएम धामी ने पांच साल की उपलब्धियों पर बने एल्बम गीत का किया विमोचन, पंचवटी फिल्म्स और आदर्श संस्था के कलाकारों को किया सम्मानित

देहरादून, 26 अगस्त 2026 — देवभूमि जेके न्यूज़ डेस्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में एक विशेष एल्बम गीत का विमोचन किया, जो उनके पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियों पर आधारित है। इसे पंचवटी फिल्म्स प्रोडक्शन और आदर्श औद्योगिक स्वायत्त सहकारिता (आदर्श संस्था) ने तैयार किया है।

“गीत-संगीत से जन-जन तक विकास यात्रा”

मुख्यमंत्री ने एल्बम से जुड़े निर्माता-निर्देशक, गीतकार, संगीतकार, गायक और अन्य कलाकारों तथा आदर्श संस्था के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा और राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलावों को गीत-संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है। उन्होंने दोहराया कि सरकार रोज़गार-स्वरोज़गार के अवसर बढ़ाने, पर्यटन को बढ़ावा देने, महिलाओं को सशक्त बनाने और युवाओं के लिए नए अवसर बनाने पर काम कर रही है, और राज्य की संस्कृति, परंपराओं व देवभूमि की पहचान के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कलाकारों का सम्मान

आदर्श संस्था की अध्यक्ष आशा कोठारी ने मुख्यमंत्री को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया और उनके नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने एल्बम के निर्माता उत्तम सिंह भंडारी, गायक विक्रम भंडारी और शिवानी नेगी, संगीतकार विजयपाल कलूड़ा सहित एल्बम से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आशा कोठारी ने की और संचालन संस्था के सचिव हरीश कोठारी ने किया। इस अवसर पर युवा मोर्चा पछवादून के जिलाध्यक्ष विनायक नौटियाल, प्रदीप दुग्गल, विजय असवाल, शोभित उनियाल, गिरीश भट्ट, लक्ष्मी नारायण नवानी, आदित्य नौटियाल, सहदेव सिंह बिष्ट और सपना जवाड़ी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में स्थानीय गीत-संगीत के ज़रिए सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की लंबी परंपरा रही है — गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगीत आंदोलनों से लेकर सरकारी अभियानों तक में इस्तेमाल होते आए हैं।

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