उत्तराखंड

विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष: पर्यटन से रोजगार और आर्थिक विकास की नई राह।

देवभूमि जे के न्यूज, हरिद्वार। उत्तराखंड की पहचान केवल चारधाम और धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। हिमालय की चोटियां, गंगा घाटी, घने वन, झीलें, बुग्याल, साहसिक पर्यटन,…

विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष: पर्यटन से रोजगार और आर्थिक विकास की नई राह।

देवभूमि जे के न्यूज, हरिद्वार। उत्तराखंड की पहचान केवल चारधाम और धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। हिमालय की चोटियां, गंगा घाटी, घने वन, झीलें, बुग्याल, साहसिक पर्यटन, योग-ध्यान की परंपरा और आयुर्वेद जैसी समृद्ध विरासत राज्य को पर्यटन की व्यापक और बहुआयामी अर्थव्यवस्था विकसित करने का अवसर देती है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि पर्यटन को केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार कैसे बनाया जाए।

वेलनेस पर्यटन उत्तराखंड के लिए इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है। योग, ध्यान, आयुर्वेद, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा को प्रमाणित एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्यटन अनुभव से जोड़ा जाए तो पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

विश्व पर्यटन दिवस 2026 की डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्रित थीम पर्यटन क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका की ओर संकेत करती है। उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए डिजिटल मैप, बहुभाषी पर्यटन जानकारी, मौसम एवं यात्रा अपडेट, ऑनलाइन बुकिंग, स्थानीय होम स्टे की जानकारी और प्रमाणित वेलनेस सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना पर्यटन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।

उत्तराखंड पर्यटन नीति 2023 में पर्यटन क्षेत्र में निवेश, सतत पर्यटन, स्थानीय रोजगार और पर्यटन उत्पादों के विविधीकरण पर जोर दिया गया है। पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पर्यटन नीति 2023 तथा उसके संचालन संबंधी दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।

पर्यटन का वास्तविक आर्थिक प्रभाव तब दिखाई देता है जब पर्यटक का खर्च होटल तक सीमित न रहकर स्थानीय टैक्सी चालक, गाइड, दुकानदार, किसान, कारीगर, होम स्टे संचालक, महिला उद्यमी और युवाओं तक पहुंचे। स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, साहसिक गतिविधियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रकृति भ्रमण जैसे अनुभव इस पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

वेलनेस पर्यटन में उत्तराखंड की विशिष्ट संभावना-

उत्तराखंड की प्राकृतिक शांति और आध्यात्मिक वातावरण उसे वेलनेस पर्यटन के लिए विशिष्ट आधार प्रदान करते हैं। हरिद्वार और ऋषिकेश को योग, ध्यान और आध्यात्मिक वेलनेस के प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक विकसित किया जा सकता है। देहरादून-मसूरी क्षेत्र को प्रकृति एवं वेलनेस पर्यटन से, जबकि पर्वतीय गांवों को होम स्टे, जैविक उत्पाद, स्थानीय भोजन और प्रकृति आधारित पर्यटन से जोड़ा जा सकता है।

डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय का कहना है कि उत्तराखंड को अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को आर्थिक अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, केरल की तर्ज पर पंचकर्म और आयुर्वेद आधारित वेलनेस केंद्रों के साथ योग, प्राकृतिक चिकित्सा, साधना और ध्यान केंद्रों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटन केवल घूमने का माध्यम न रहकर स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्रकृति आधारित जीवनशैली का अनुभव बन सकता है।

उनका कहना है कि ऐसे केंद्रों का विकास प्रशिक्षित मानव संसाधन, निर्धारित मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणित सेवाओं के साथ किया जाना आवश्यक है, ताकि वेलनेस पर्यटन की विश्वसनीयता बनी रहे।

आयुष एवं वेलनेस क्षेत्र को रोजगार और निवेश से जोड़ने की संभावना पर अप्रैल 2026 में आयुष मंत्री मदन कौशिक ने भी जोर दिया था। अमर उजाला की 7 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रदेश में आयुष एवं वेलनेस क्षेत्र में रोजगार और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए नई नीति तैयार करने की बात कही थी।

इस दृष्टिकोण से पर्यटन और आयुष को अलग-अलग गतिविधियों के बजाय एक-दूसरे से जुड़े आर्थिक क्षेत्रों के रूप में विकसित करने की संभावना सामने आती है।

होम स्टे बन सकते हैं गांवों की अर्थव्यवस्था की रीढ़

उत्तराखंड में होम स्टे योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पर्यटन विभाग के अनुसार होम स्टे योजना का उद्देश्य पर्यटकों को ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवास सुविधा उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार तथा भवन मालिकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।

होम स्टे को केवल कमरे किराये पर देने की व्यवस्था न बनाकर स्थानीय अनुभव से जोड़ा जाए तो इसका आर्थिक प्रभाव और व्यापक हो सकता है। पर्यटकों को स्थानीय भोजन, गांव की संस्कृति, कृषि गतिविधियां, योग, ध्यान, प्रकृति भ्रमण, लोक संगीत, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा सकता है।

वर्तमान होम स्टे व्यवस्था में पंजीकरण, स्थानीय निवास और सीमित कमरों जैसी निर्धारित शर्तें भी हैं। पर्यटन विभाग की जानकारी के अनुसार योजना का उद्देश्य स्थानीय रोजगार और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।

केरल से सीख, लेकिन उत्तराखंड का अपना मॉडल

केरल ने आयुर्वेद और वेलनेस को पर्यटन उत्पाद के रूप में स्थापित किया है। उत्तराखंड के लिए चुनौती केवल किसी दूसरे राज्य के मॉडल की नकल करना नहीं, बल्कि अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं पर आधारित विशिष्ट मॉडल विकसित करना है।

उत्तराखंड का संभावित मॉडल हिमालय + योग + आयुर्वेद + ध्यान + प्राकृतिक चिकित्सा + स्थानीय संस्कृति + प्रकृति पर्यटन के संयोजन पर आधारित हो सकता है।

हरिद्वार-ऋषिकेश को योग एवं आध्यात्मिक वेलनेस, देहरादून-मसूरी को प्रकृति एवं वेलनेस, जबकि गढ़वाल और कुमाऊं के ग्रामीण क्षेत्रों को होम स्टे, ट्रेकिंग, स्थानीय भोजन, जैविक उत्पाद और सांस्कृतिक पर्यटन से जोड़ा जा सकता है।

डिजिटल तकनीक से दूरस्थ पर्यटन स्थलों को मिलेगी नई पहचान-

उत्तराखंड की असली ताकत उसके प्राकृतिक परिदृश्य हैं, लेकिन केवल सड़क और होटल बना देना पर्याप्त नहीं है। दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए डिजिटल जानकारी और भरोसेमंद सेवाओं की भी आवश्यकता है।

प्रत्येक पर्यटन स्थल के लिए डिजिटल मैप, बहुभाषी जानकारी, मौसम की स्थिति, सड़क एवं यात्रा संबंधी अपडेट, स्थानीय होम स्टे, ऑनलाइन बुकिंग, स्थानीय गाइड और प्रमाणित वेलनेस सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यात्रा योजना से पर्यटक अपनी रुचि, बजट और उपलब्ध समय के अनुसार यात्रा कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं।

इससे कम चर्चित पर्यटन स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने में मदद मिल सकती है और प्रसिद्ध स्थलों पर अत्यधिक दबाव कम करने की दिशा में भी सहायता मिल सकती है।

धार्मिक पर्यटन से आगे अनुभव आधारित पर्यटन की ओर

उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन की मजबूत पहचान है, लेकिन भविष्य के पर्यटन के लिए विविधता जरूरी है। चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ योग, ध्यान, आयुर्वेद, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, ट्रेकिंग, पक्षी अवलोकन, हिमालयी संस्कृति और स्थानीय खानपान को अलग-अलग तथा संयुक्त पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय के अनुसार, उत्तराखंड में पर्यटन का अगला चरण ऐसा होना चाहिए जिसमें पर्यटक केवल किसी स्थान को देखकर वापस न जाए, बल्कि कुछ दिन रुककर प्रकृति, संस्कृति, योग, आयुर्वेद और स्थानीय जीवन का अनुभव करे। इससे पर्यटन से उत्पन्न आर्थिक गतिविधियां होटल तक सीमित न रहकर गांव, युवा, महिला उद्यमी, स्थानीय कारीगर, किसान, टैक्सी चालक और सेवा क्षेत्र तक पहुंच सकती हैं।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का व्यापक इकोसिस्टम-

पर्यटन से रोजगार केवल होटल और यात्रा व्यवसाय में नहीं बनता। एक सफल पर्यटन गंतव्य के साथ परिवहन, भोजन, कृषि, हस्तशिल्प, निर्माण, डिजिटल सेवाएं, गाइडिंग, सुरक्षा, मनोरंजन और वेलनेस जैसी अनेक गतिविधियां जुड़ती हैं।

युवाओं को स्थानीय स्तर पर टूरिस्ट गाइड, एडवेंचर स्पोर्ट्स, योग, वेलनेस हॉस्पिटैलिटी, डिजिटल मार्केटिंग, होम स्टे प्रबंधन, स्थानीय व्यंजन, फोटोग्राफी और प्रकृति व्याख्या जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाए तो पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की मजबूत कड़ी तैयार हो सकती है। पर्यटन विभाग की योजनाओं में कौशल विकास और पर्यटन आधारित स्वरोजगार को भी स्थान दिया गया है।

सतत पर्यटन ही उत्तराखंड के भविष्य की जरूरत-

उत्तराखंड का पर्यटन मॉडल पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर विकसित करना होगा। अत्यधिक भीड़, कचरा, जल संकट, यातायात दबाव और अनियोजित निर्माण पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उत्तराखंड के पर्यटन मास्टर प्लान में भी पर्यटन के सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से समावेशी विकास तथा स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर उत्तराखंड के लिए संदेश स्पष्ट है—पर्यटन केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी है। यदि हिमालय की प्राकृतिक संपदा, आध्यात्मिक परंपरा, योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, होम स्टे और डिजिटल तकनीक को संतुलित तथा योजनाबद्ध तरीके से जोड़ा जाए तो पर्यटन राज्य के गांवों और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों का बड़ा माध्यम बन सकता है।

देवभूमि जेके न्यूज़ (जय कुमार तिवारी) की विशेष प्रस्तुति-

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