ऋषिकेश

परमार्थ विद्या मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन.

देवभूमि जेके न्यूज | ऋषिकेश, 17 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर चंद्रेश्वर नगर स्थित परमार्थ विद्या मंदिर में शक्ति, साधना और सेवा की त्रिवेणी देखने…

परमार्थ विद्या मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन.

देवभूमि जेके न्यूज | ऋषिकेश, 17 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर चंद्रेश्वर नगर स्थित परमार्थ विद्या मंदिर में शक्ति, साधना और सेवा की त्रिवेणी देखने को मिली। नवरात्रि के सप्तम दिवस पर परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती के सान्निध्य में मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना एवं हवन किया गया। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से विश्व शांति, मानवता के कल्याण, प्रकृति संरक्षण और समस्त सृष्टि के मंगल की कामना की गई। आयोजन में सनातन संस्कृति की उस परंपरा को रेखांकित किया गया, जिसमें पूजा-अर्चना के साथ सेवा, करुणा और लोककल्याण को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

मां कालरात्रि को भय, अज्ञान और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों को निर्भयता, आत्मबल, धैर्य और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां भगवती के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मां भगवती की आराधना और हवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन में प्रेम, सद्भाव, करुणा और सेवा को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने आध्यात्मिक चेतना को सकारात्मक विचारों और श्रेष्ठ कर्मों से जोड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर के भय पर विजय प्राप्त करता है और दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखता है, तब वह समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

हवन की सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने शुभ संकल्पों, आत्मशुद्धि और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। जीवन में अहंकार, द्वेष, ईर्ष्या और नकारात्मकता का त्याग कर प्रेम एवं सद्भाव को अपनाना ही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।

इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे के माध्यम से अन्नदान, अतिथि-सत्कार और समभाव की भारतीय परंपरा का संदेश दिया गया। भंडारे में सेवा और समर्पण की भावना के साथ श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सच्ची उपासना वही है, जो मानवता के प्रति संवेदना और सेवा के भाव को मजबूत करे।

कार्यक्रम में राजीव जैन, नीना जैन, सुभाष छेत्री, उपासना, परमार्थ विद्या मंदिर के शिक्षक-शिक्षिकाएं, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार एवं आचार्य उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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