देव भूमि जे के न्यूज,डोईवाला, 15 अक्टूबर। हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में आयोजित रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन भरत-शत्रुघ्न आगमन, भरत मिलाप, शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और रावण दरबार की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से भरत मिलाप के प्रसंग ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया और ‘भरत जैसा भाई हो’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
रामलीला के पांचवें दिन के मंचन का शुभारंभ भरत और शत्रुघ्न की ननिहाल से अयोध्या वापसी के प्रसंग से हुआ। अयोध्या पहुंचने पर जब भरत को अपने पिता महाराज दशरथ के निधन और बड़े भाई प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास की जानकारी मिली, तो वे शोक से व्याकुल हो उठे। पिता के वियोग और भाई से बिछड़ने के दुख में भरत फूट-फूटकर रोने लगे। जब उन्हें पता चला कि माता कैकेयी ने श्रीराम को वनवास भेजकर उनके लिए राजगद्दी प्राप्त करने का निर्णय लिया था, तो उन्होंने इस कृत्य पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। भरत ने स्पष्ट कहा कि जिस राजगद्दी के लिए उनके आराध्य और बड़े भाई को वनवास जाना पड़ा, वह उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है। वहीं, शत्रुघ्न ने भी मंथरा को उसके कृत्य के लिए फटकार लगाई।
इसके बाद भरत और शत्रुघ्न गुरु वशिष्ठ तथा अयोध्या की प्रजा के साथ प्रभु श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट रवाना हुए। चित्रकूट में जब श्रीराम ने भरत को अपनी ओर आते देखा, तो वे दौड़कर उनसे गले मिले। दोनों भाइयों के मिलन का दृश्य इतना मार्मिक था कि दर्शक भावुक हो उठे। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, लेकिन जब श्रीराम ने पिता के वचन का पालन करने और 14 वर्ष का वनवास पूरा करने का अपना संकल्प दोहराया, तो भरत ने उनकी चरण पादुका को सिर पर धारण किया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं राजा के रूप में राजसुख भोगने के बजाय श्रीराम के प्रतिनिधि के रूप में अयोध्या का शासन संचालित करेंगे। इस प्रसंग ने भाई के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा का अनुपम संदेश दिया।
इसके पश्चात पंचवटी में शूर्पणखा प्रसंग का मंचन हुआ। सुंदर रूप धारण कर पहुंची शूर्पणखा ने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष प्रणय निवेदन किया। अस्वीकार किए जाने पर उसने माता सीता पर आक्रमण करने का प्रयास किया, जिसके बाद लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए। अपमानित और क्रोधित शूर्पणखा अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंची तथा उन्हें युद्ध के लिए उकसाया। खर-दूषण अपनी विशाल सेना के साथ प्रभु श्रीराम पर आक्रमण करने पहुंचे, लेकिन श्रीराम ने अपने पराक्रम से उनका वध कर दिया।
रामलीला के अंतिम प्रसंग में रावण दरबार का मंचन किया गया। शूर्पणखा ने रावण को पंचवटी में हुई घटना की जानकारी दी और माता सीता के हरण के लिए उकसाया। इस प्रसंग के साथ ही रामायण की कथा ने एक नए मोड़ की ओर कदम बढ़ाया, जहां से सीता हरण और लंका युद्ध की घटनाओं की भूमिका तैयार होती है।
रामलीला महोत्सव के छठे दिन, 16 अक्टूबर को बूढ़ा मारीच प्रसंग, साधु वेश में रावण का आगमन, सीता हरण, शबरी भक्ति, हनुमान अवतरण और सुग्रीव दरबार की लीलाओं का मंचन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, आगामी प्रसंगों में रामभक्ति, त्याग, धर्म और अधर्म के संघर्ष को मंच के माध्यम से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।







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