उत्तराखंड

*भगवान श्रीराम ने किया बाली वध, अधर्म के विरुद्ध दिया नारी सम्मान और मर्यादा का संदेश*

देव भूमि जे के न्यूज,प्रतीतनगर (रायवाला), 31 अक्टूबर 2026। प्राथमिक विद्यालय, श्रीरामलीला चौक, वार्ड नंबर-06, प्रतीतनगर गांव रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्रीरामलीला…


देव भूमि जे के न्यूज,प्रतीतनगर (रायवाला), 31 अक्टूबर 2026।

प्राथमिक विद्यालय, श्रीरामलीला चौक, वार्ड नंबर-06, प्रतीतनगर गांव रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्रीरामलीला महोत्सव में शुक्रवार को सुग्रीव दरबार, श्रीराम-हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता, बाली वध तथा माता सीता की खोज के प्रसंगों का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। देर रात तक रामलीला परिसर श्रद्धालुओं और दर्शकों से भरा रहा तथा जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

बाली वध के प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीराम ने अधर्म के विरुद्ध न्याय, नारी सम्मान और सामाजिक मर्यादा का संदेश दिया। मंचन में बताया गया कि पराई स्त्री को माता के समान सम्मान देना चाहिए। किसी भी स्त्री, बहन, पुत्रवधू अथवा कन्या के प्रति कभी भी बुरी दृष्टि नहीं रखनी चाहिए। यह प्रसंग समाज को नारी गरिमा और नैतिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देता है।

**श्रीराम-हनुमान मिलन ने दर्शकों को किया भावुक**

श्रीरामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि शुक्रवार की लीला में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वन-वन भटकते हुए ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। दोनों भाइयों को देखकर सुग्रीव के मन में आशंका उत्पन्न हुई। उनकी वास्तविकता जानने के लिए सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा।

हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचे। वार्तालाप के दौरान प्रभु श्रीराम ने अपना परिचय दिया और वन में विचरण करने का उद्देश्य बताया। प्रभु श्रीराम को पहचानते ही हनुमान जी भावविभोर हो गए और उनके चरणों में गिर पड़े। इस भावुक दृश्य ने उपस्थित दर्शकों को भी भावविभोर कर दिया।

इसके बाद हनुमान जी ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट कराई। दोनों के बीच मित्रता हुई और सुग्रीव ने भगवान श्रीराम को अपने साथ हुए अन्याय और अपनी व्यथा से अवगत कराया।

**बाली वध के मंचन से मिला न्याय और मर्यादा का संदेश**

इसके पश्चात वानरराज बाली के दरबार का दृश्य प्रस्तुत किया गया। सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों भाइयों के बीच गदा युद्ध और मल्लयुद्ध हुआ। इसी दौरान भगवान श्रीराम ने अपने धनुष से बाली का वध कर दिया।

मृत्यु के समय बाली ने भगवान श्रीराम से कहा कि सुग्रीव आपकी क्या सहायता कर पाएगा? यदि आप मुझे बताते तो मैं रावण को भी परास्त कर सकता था, जिसे मैंने छह माह तक अपनी कैद में रखा था। इस संवाद के साथ बाली वध का प्रसंग संपन्न हुआ।

**संपाती ने बताया माता सीता का पता, जामवंत ने हनुमान को कराया शक्ति का स्मरण**

रामलीला के अगले दृश्य में माता सीता की खोज में निकले वानर और भालू दल का मंचन किया गया। खोज करते-करते सभी थककर समुद्र तट पर पहुंच गए। विशाल समुद्र को देखकर वे निराश हो गए। इसी दौरान उनकी भेंट संपाती नामक गिद्ध से हुई। संपाती ने बताया कि रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया है।

यह समाचार मिलते ही वानर दल में उत्साह का संचार हुआ, लेकिन विशाल समुद्र पार कर लंका पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती थी। सभी वानर और भालू इस बात को लेकर असमंजस में थे कि समुद्र पार कौन करेगा। तभी जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी असीम शक्तियों का स्मरण कराया और कहा—

“पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।।”

जामवंत जी के प्रेरणादायक वचनों को सुनकर हनुमान जी को अपनी शक्ति का स्मरण हुआ। उन्होंने विशाल रूप धारण कर सिंहनाद किया और कहा कि इस विशाल खारे समुद्र को वे खेल-खेल में पार कर सकते हैं। इस रोमांचक दृश्य ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया और पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम एवं जय बजरंगबली के उद्घोष से गूंज उठा।

**निर्देशक की साधना से जीवंत होते हैं रामलीला के पात्र**

इस अवसर पर प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल ने रामलीला के निर्देशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीरामलीला महोत्सव में निर्देशक मंच की आत्मा होता है। मंच पर कलाकारों का अभिनय दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे निर्देशक की महीनों की तपस्या, सोच, साधना और मार्गदर्शन होता है। जो कलाकार निर्देशक के भावों को समझकर आत्मसात कर लेता है, वही अपने पात्र को जीवंत बना पाता है।

उन्होंने रामलीला महोत्सव के मुख्य निर्देशक महेंद्र सिंह राणा की साधना, समर्पण और कुशल निर्देशन की सराहना करते हुए उन्हें हृदय से नमन किया। उन्होंने कहा कि कलाकार मंच पर प्रस्तुति देता है, लेकिन उस प्रस्तुति की वास्तविक आत्मा निर्देशक होता है।

**अतिथियों एवं कलाकारों को समिति ने किया सम्मानित**

कार्यक्रम के दौरान लोक कल्याण समिति की ओर से गढ़वाल महासभा रायवाला के प्रतिनिधियों तथा श्रीरामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी ऋषिकेश से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में मयंक शर्मा, जिन्होंने हनुमान एवं परशुराम के पात्र निभाए; अंकुश मौर्य, जिन्होंने भरत की भूमिका निभाई; विनायक कुमार, जिन्होंने लक्ष्मण एवं श्रवण कुमार के पात्र निभाए; भारतेन्दु शंकर पाण्डेय, जिन्होंने एक रामलीला में श्रीराम और दूसरी में रावण की भूमिका निभाई तथा अनुज पोखरियाल शामिल रहे। सभी को परिवार सहित सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी, प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू), मुख्य एवं वरिष्ठ निर्देशक महेंद्र सिंह राणा, ग्राम प्रधान राजेश जुगलान, समिति सदस्य नवीन चमोली, अंजु बड़ोला, राजेन्द्र प्रसाद तिवाड़ी, सुनील तिवाड़ी, सूरज चमोली, आशीष उनियाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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