धर्म-कर्म

*अयोध्या में 30 लाख दीपों से जगमगाई रामनगरी, सरयू के 56 घाटों पर बना भव्य दीपोत्सव का अद्भुत दृश्य*

देव भूमि जे के न्यूज,अयोध्या। भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या शनिवार को दीपों की अद्भुत रोशनी से जगमगा उठी। दसवें दीपोत्सव के अवसर पर राम की पैड़ी…


देव भूमि जे के न्यूज,अयोध्या। भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या शनिवार को दीपों की अद्भुत रोशनी से जगमगा उठी। दसवें दीपोत्सव के अवसर पर राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के 56 घाटों पर लगभग 30 लाख दीप प्रज्वलित किए गए। दीपों की सुनहरी रोशनी से पूरी रामनगरी का दृश्य अलौकिक हो गया। भक्ति, आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता के इस भव्य संगम ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

इस वर्ष दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहभागिता की। आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और सरयू की महाआरती ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

35 हजार स्वयंसेवकों ने सजाए 30 लाख दीप

इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए अवध विश्वविद्यालय के लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों ने कई दिनों तक मेहनत की। राम की पैड़ी और सरयू तट के 56 घाटों पर दीपों को आकर्षक कतारों एवं कलात्मक आकृतियों में सजाया गया। दीपों में तेल डालने और बातियां लगाने की व्यवस्था भी स्वयंसेवकों ने संभाली।

राम मंदिर परिसर में जले एक लाख दीप

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को भी दीपोत्सव के अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया। मंदिर परिसर और आसपास के 18 मंदिरों में लगभग एक लाख मिट्टी के दीप प्रज्वलित किए गए। इसके लिए परिसर को पांच जोन में बांटकर व्यवस्थाएं की गई थीं।

2151 वेदाचार्यों ने की सरयू की महाआरती, ड्रोन शो ने मोहा मन

दीपोत्सव के दौरान 2,151 वेदाचार्यों द्वारा सरयू की महाआरती किए जाने का भव्य आयोजन हुआ। वहीं लगभग 2,100 स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से आसमान में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का प्रदर्शन किया गया। लेजर शो और रंग-बिरंगी रोशनी ने रामनगरी की सुंदरता को और बढ़ा दिया।

अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने प्रस्तुत की रामायण की झलक

दीपोत्सव में भारत सहित दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकारों ने रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लगभग 2,500 कलाकारों ने 12 मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इससे दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान मिली।

आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का संदेश

अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म की पुनर्स्मृति का उत्सव है। लाखों दीपों की रोशनी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में दीप केवल प्रकाश का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।

रामनगरी का यह भव्य आयोजन दीपावली की उस सनातन परंपरा को जीवंत करता है, जिसमें भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में घर-घर दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाई जाती हैं।

देवभूमि JK News

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