उत्तराखंड

*दीपावली पर बच्चों को अकेले पटाखे जलाने की न दें अनुमति : डॉ. राजे नेगी*

**देवभूमि जेके न्यूज, ऋषिकेश।** दीपावली खुशियों, रोशनी और उत्साह का पर्व है। इस अवसर पर बच्चे और बड़े सभी आतिशबाजी कर त्योहार का आनंद लेते हैं, लेकिन पटाखे…

**देवभूमि जेके न्यूज, ऋषिकेश।** दीपावली खुशियों, रोशनी और उत्साह का पर्व है। इस अवसर पर बच्चे और बड़े सभी आतिशबाजी कर त्योहार का आनंद लेते हैं, लेकिन पटाखे जलाते समय बरती गई थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेगी आई केयर सेंटर के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. राजे नेगी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें और आतिशबाजी के दौरान स्वयं उनकी निगरानी करें।

डॉ. राजे नेगी ने कहा कि दीपावली पर पटाखों से आंखों में चोट, जलने और अन्य गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। विशेष रूप से रॉकेट, अनार, फुलझड़ी और तेज आवाज वाले पटाखों का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। पटाखों से निकलने वाली चिंगारी आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में बच्चों को पटाखे जलाने के सुरक्षित तरीके और सावधानियों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने आतिशबाजी के दौरान सुरक्षा के लिए अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें और उनके साथ हमेशा किसी जिम्मेदार बड़े व्यक्ति का होना जरूरी है। पटाखे खुले मैदान या खाली स्थान पर ही जलाएं तथा घर के अंदर, बालकनी और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आतिशबाजी करने से बचें।

उन्होंने सलाह दी कि किसी भी संभावित आग या दुर्घटना से बचाव के लिए पानी और रेत से भरी बाल्टी पहले से तैयार रखें। पटाखे जलाते समय सूती एवं उचित फिटिंग वाले कपड़े पहनें। नायलॉन, सिंथेटिक और ढीले कपड़ों से परहेज करें, क्योंकि इनमें आग जल्दी पकड़ सकती है। हमेशा विश्वसनीय दुकानों से अच्छी गुणवत्ता वाले पटाखे खरीदें और प्रतिबंधित आतिशबाजी से दूर रहें।

डॉ. नेगी ने कहा कि रॉकेट और तेज आवाज वाले पटाखे जलाते समय बच्चों को सुरक्षित दूरी पर रखें। पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं। यदि कोई पटाखा नहीं जलता है तो उसके पास तुरंत न जाएं और उसे दोबारा जलाने का प्रयास न करें। इस्तेमाल किए गए पटाखों को पानी या रेत में डालकर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करें।

उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि यदि पटाखा जलाते समय किसी की आंख में चिंगारी लग जाए या चोट पहुंच जाए तो आंख को बिल्कुल न रगड़ें और न ही उस पर दबाव डालें। आंख में चोट लगने की स्थिति में बिना देरी किए नेत्र चिकित्सक या नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।

अंत में डॉ. राजे नेगी ने सभी अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील की कि दीपावली का त्योहार खुशियों और रोशनी के साथ मनाएं, लेकिन सुरक्षा को कभी नजरअंदाज न करें। थोड़ी सी सतर्कता बच्चों की आंखों की रोशनी और अनमोल जीवन को सुरक्षित रख सकती है।

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