उत्तराखंड

श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल में दीपोत्सव 2026 की धूम, विद्यार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन परिवर्तन का किया भावपूर्ण मंचन*

देव भूमि जे के न्यूज,ऋषिकेश, 5 नवंबर। श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल, ऋषिकेश में दीपोत्सव 2026 का भव्य आयोजन हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। दीपावली…

देव भूमि जे के न्यूज,ऋषिकेश, 5 नवंबर। श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल, ऋषिकेश में दीपोत्सव 2026 का भव्य आयोजन हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। दीपावली के पावन पर्व पर आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में महंत रवि प्रपन्नाचार्य एवं श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

विद्यालय परिसर दीपावली की रोशनी, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक उल्लास से सराबोर नजर आया। विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और कलात्मक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, भक्ति भावना तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश प्रभावशाली ढंग से दिया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महर्षि वाल्मीकि के जीवन परिवर्तन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा का भावपूर्ण मंचन किया। नाटिका के माध्यम से बताया गया कि आत्मबोध, दृढ़ संकल्प, भक्ति और सत्कर्मों के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य के.एल. दीक्षित ने अपने संबोधन में दीपोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना की तथा आयोजन को सफल बनाने में शिक्षकों के समर्पित प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, धर्म, सदाचार और करुणा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि कुसुम कंडवाल ने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके आत्मविश्वास, रचनात्मकता और समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानकर जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए। शिक्षा, आत्मविश्वास और मजबूत संस्कार ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और संवेदनशील नागरिक बनने का संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथि महंत रवि प्रपन्नाचार्य एवं यमुना प्रसाद त्रिपाठी ने भी विद्यालय के इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को देश की गौरवशाली आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों का विकास करते हैं।

विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आयोजन समिति के सामूहिक प्रयासों से दीपोत्सव का आयोजन यादगार बन गया।

कार्यक्रम ने संदेश दिया कि दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन के अंधकार को दूर कर ज्ञान, प्रेम, सद्भावना और सदाचार का प्रकाश फैलाने का अवसर भी है।

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