डेस्क -राजस्थान। जिंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी इंसान को ऐसे संयोगों से रूबरू कराता है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र से सामने आई एक भावुक कहानी इन दिनों चर्चा में है। करीब 14 महीने पहले झरने में डूबने से जान गंवाने वाले दो जिगरी दोस्तों के परिवारों में अब दोबारा खुशियां लौटी हैं। दोनों युवकों की माताओं ने लगभग 12 घंटे के अंतराल पर दो बेटों को जन्म दिया है। इस अनोखे संयोग को परिजन और स्थानीय ग्रामीण दोनों दोस्तों का पुनर्जन्म मानकर देख रहे हैं।
पिकनिक मनाने गए थे तीन दोस्त, हादसे में गई जान
यह घटना मेड़ता क्षेत्र के मोकलपुर और सातलावास गांवों से जुड़ी है। प्राप्त मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 14 जुलाई 2025 को मोकलपुर निवासी नरेंद्र बेड़ा और सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल अपने दोस्त प्रदीप विश्नोई के साथ चित्तौड़गढ़ जिले के निलिया महादेव झरने पर पिकनिक मनाने गए थे। बताया गया है कि तीनों युवक नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे थे। पिकनिक के दौरान पानी के तेज बहाव में फंसने के कारण तीनों की डूबने से मौत हो गई। इस हादसे ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
दोस्तों की मौत के बाद उजड़ गए थे परिवारों के सपने
नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल की दोस्ती काफी गहरी बताई जाती है। दोनों युवकों की असमय मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जवान बेटों को खोने का दर्द ऐसा था, जिसकी भरपाई करना किसी के लिए संभव नहीं था। परिवारों के लिए जिंदगी जैसे ठहर गई थी। लेकिन समय के साथ दोनों परिवारों ने इस दुख से उबरने की कोशिश की और एक बार फिर जीवन में खुशियां लौटाने की उम्मीद जगाई।
अंतिम संस्कार के समय और बच्चों के जन्म में 12 घंटे का संयोग
इस कहानी को और भी भावुक बनाने वाला पहलू समय का वह संयोग है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे के दिन नरेंद्र बेड़ा का शव मिल गया था और उसका अंतिम संस्कार उसी दिन कर दिया गया। वहीं नरेंद्र मुंवाल का शव करीब 12 घंटे बाद मिलने के कारण उसका अंतिम संस्कार अगले दिन हुआ।
अब दोनों परिवारों में बच्चों के जन्म के समय भी ऐसा ही संयोग सामने आया है। बताया गया है कि नरेंद्र बेड़ा की मां ने पहले बेटे को जन्म दिया और उसके लगभग 12 घंटे बाद नरेंद्र मुंवाल की मां की गोद में भी पुत्र ने जन्म लिया। परिवारों के लिए यह पल दुख की लंबी अवधि के बाद नई उम्मीद और खुशी लेकर आया।
नसबंदी खुलवाने के बाद दोबारा मां बनीं दोनों महिलाएं
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों महिलाओं ने पहले परिवार नियोजन के तहत नसबंदी करवा ली थी। अपने जवान बेटों को खोने के बाद उन्होंने दोबारा मां बनने का निर्णय लिया और नसबंदी खुलवाने की चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई। इसके बाद गर्भधारण हुआ और दोनों ने बेटों को जन्म दिया।
करीब एक साल, दो महीने और 21 दिन पहले हुए हादसे के बाद दोनों घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजने से परिवारों के जीवन में नई रौनक लौट आई है। जिन घरों में कभी बेटों की असमय मौत का मातम पसरा था, वहां अब नवजात बच्चों के आने से खुशियों का माहौल है।
पुनर्जन्म की मान्यता और एक भावुक संयोग
दोनों बच्चों के जन्म और दिवंगत युवकों के अंतिम संस्कार के समय में बताए जा रहे समान अंतर ने इस घटना को चर्चा का विषय बना दिया है। परिजन और ग्रामीण इसे दोनों दोस्तों के पुनर्जन्म से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, पुनर्जन्म की बात धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है; इस घटना में सामने आया तथ्य दोनों परिवारों में लगभग 12 घंटे के अंतराल पर बच्चों का जन्म होना है।
यह कहानी एक ओर दो परिवारों के पुराने दुख को याद दिलाती है, तो दूसरी ओर उनके जीवन में लौटी नई खुशियों की तस्वीर भी पेश करती है। दो दोस्तों की असमय विदाई के बाद उनके परिवारों में बच्चों के जन्म ने एक ऐसा भावुक संयोग पैदा किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
देवभूमि जेके न्यूज के लिए राजस्थान से सामने आई यह कहानी दुख, उम्मीद, मातृत्व और मानवीय भावनाओं से जुड़ा एक मार्मिक घटनाक्रम है।
*श्रोत – सोशल मीडिया







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