उत्तराखंड

*कुंभकर्ण और मेघनाद वध से गूंजा प्रतीतनगर, सुलोचना सती की लीला ने दर्शकों को किया भावुक*

देव भूमि जे के न्यूज,रायवाला। प्रतीतनगर गांव के वार्ड नंबर 06 स्थित प्राथमिक विद्यालय श्रीरामलीला चौक में लोक कल्याण समिति, प्रतीतनगर (रजिस्टर्ड) की ओर से आयोजित पंचम श्रीरामलीला…

देव भूमि जे के न्यूज,रायवाला। प्रतीतनगर गांव के वार्ड नंबर 06 स्थित प्राथमिक विद्यालय श्रीरामलीला चौक में लोक कल्याण समिति, प्रतीतनगर (रजिस्टर्ड) की ओर से आयोजित पंचम श्रीरामलीला महोत्सव में कुंभकर्ण वध, मेघनाद वध एवं सुलोचना सती की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि सुलोचना सती के मार्मिक प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।

श्रीरामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं समिति प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि लक्ष्मण के स्वस्थ होने के बाद युद्ध दोबारा प्रारंभ हुआ। रावण ने एक-एक कर दुर्मुख, देवांतक, अतिकाय और अकंपन को युद्धभूमि में भेजा, लेकिन श्रीराम की सेना ने सभी का वध कर दिया।

इसके बाद रावण ने कुंभकर्ण को नींद से जगाकर युद्ध की पूरी स्थिति बताई। कुंभकर्ण ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाकर भगवान श्रीराम की शरण में जाने की सलाह दी, लेकिन रावण ने अहंकारवश उसकी बात नहीं मानी। अंततः कुंभकर्ण युद्धभूमि में पहुंचा और भगवान श्रीराम के हाथों उसका वध हुआ।

इसके पश्चात मेघनाद ने अजेय होने के उद्देश्य से यज्ञ प्रारंभ किया। विभीषण से इसकी जानकारी मिलने पर भगवान श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण ने यज्ञ को विध्वंस कर दिया। इसके बाद हुए भीषण युद्ध में लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया।

मेघनाद की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी सुलोचना के सती होने की मार्मिक लीला प्रस्तुत की गई। पति का शीश लेकर लंका पहुंची सुलोचना ने समुद्र तट पर तैयार चंदन की चिता पर पति का शीश गोद में रखकर अग्नि में सती होने का प्रसंग प्रस्तुत किया। इस भावपूर्ण मंचन ने पूरे वातावरण को भावुक कर दिया।

मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक एवं अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा भारत के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजे सिंह नेगी ने कहा कि श्रीरामलीला केवल धार्मिक आयोजन या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और जीवन मूल्यों का जीवंत मंच है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श नेतृत्व की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि कुंभकर्ण का प्रसंग सत्य और धर्म का साथ देने का संदेश देता है, जबकि मेघनाद का अंत अहंकार और अधर्म के विनाश का प्रतीक है। सुलोचना की लीला प्रेम, समर्पण और निष्ठा के भाव को दर्शाती है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी और बच्चों को रामायण जैसे महान ग्रंथों तथा उनके आदर्श चरित्रों से जोड़ा जाए।

डॉ. नेगी ने लोक कल्याण समिति की सराहना करते हुए कहा कि पांचवें वर्ष भी जिस समर्पण और उत्साह के साथ श्रीरामलीला महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, वह सराहनीय है। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर समिति की ओर से मुख्य अतिथि डॉ. राजे सिंह नेगी, अति विशिष्ट अतिथि दिनेश शर्मा, खाद्य आपूर्ति अधिकारी एवं जिलाध्यक्ष खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संघ, जनपद हरिद्वार, हिमांशु दिलीप रावत, केंद्रीय प्रवक्ता उत्तराखंड क्रांति दल, वैभव सिंह, प्रदेश सचिव उत्तराखंड क्रांति दल, जय सिंह, जिला उपाध्यक्ष कार्यकारी परवादून तथा मनीष सेमवाल, सीईओ थीम योर ड्रीम एवं निदेशक अग्रमन्य सामाजिक कल्याण संस्था को दरबार की माला एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही प्रतीतनगर एवं आसपास के क्षेत्रों की विभिन्न कीर्तन मंडलियों को भी सम्मानित किया गया। अतिथियों ने समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

राम की भूमिका सौरभ चमोली, लक्ष्मण की भूमिका चन्द्रमणि शर्मा, हनुमान की भूमिका आशीष सेमवाल, रावण की भूमिका सचिन गौड़, विभीषण एवं मेघनाद की भूमिका सूरज चमोली, कुंभकर्ण की भूमिका बिजेंद्र पैन्यूली तथा सुलोचना की भूमिका राहुल कोहली ने निभाई।

इस अवसर पर मुख्य मंच उद्घोषक एवं समिति प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू), मुख्य एवं वरिष्ठ निर्देशक महेंद्र सिंह राणा, ग्राम प्रधान प्रतीतनगर राजेश जुगलान, समिति अध्यक्ष गंगाधर गौड़, सचिव नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी, नवीन चमोली, आशीष सेमवाल, राजेंद्र प्रसाद तिवाड़ी एवं सुनील तिवाड़ी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संगीत पक्ष में तबले पर कमल रामानुज (बिट्टू), ऑक्टोपैड पर कुनाल शर्मा और हारमोनियम पर पूरण चंद ने शानदार संगत देकर मंचन को और प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

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