देवभूमि जेके न्यूज | ऋषिकेश, 17 अक्टूबर 2026।
ऋषिकेश स्थित श्री निर्मल आश्रम में महंत बाबा राम सिंह जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और जन्मोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग कर गुरु महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। सुबह से ही आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। गुरुद्वारे में शब्द-कीर्तन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु वाणी का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
जन्मोत्सव के अवसर पर आश्रम में गुरु भक्ति और सेवा का विशेष संगम देखने को मिला। शब्द-कीर्तन के दौरान गुरुवाणी से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के जन्मदिवस पर उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेशों से पहुंचे श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होकर इस पावन अवसर को उत्साहपूर्वक मनाया।
लंगर में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
जन्मोत्सव के अवसर पर निर्मल आश्रम में विशाल लंगर का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम की सेवा परंपरा के अनुरूप श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था की गई, जहां सभी ने एक साथ बैठकर प्रसाद छका। इस दौरान श्रद्धालुओं को बाबा राम सिंह जी महाराज के हाथों प्रसाद प्राप्त करने का सौभाग्य भी मिला। गुरु महाराज से प्रसाद प्राप्त कर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और उन्होंने इसे अपने लिए सौभाग्य का क्षण बताया।
कार्यक्रम में श्रद्धा, सेवा, समर्पण और आपसी भाईचारे की भावना विशेष रूप से दिखाई दी। लंगर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने सेवा और समानता के संदेश को भी सशक्त किया। आश्रम में आयोजित इस धार्मिक समारोह में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
महंत बाबा राम सिंह जी महाराज के 77वें जन्मोत्सव पर निर्मल आश्रम में दिनभर धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल बना रहा। शब्द-कीर्तन, गुरु दर्शन और लंगर सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर को यादगार बनाया। ऋषिकेश की आध्यात्मिक परंपरा के अनुरूप आयोजित इस समारोह ने गुरु भक्ति और सेवा के महत्व को रेखांकित किया।







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