देवभूमि जेके न्यूज , देहरादून 8 सितंबर 2026-
उत्तराखंड के दो नन्हे पर्वतारोहियों ने अपनी अद्भुत साहसिक उपलब्धि से एक बार फिर देवभूमि का नाम देश और दुनिया में रोशन किया है। तंजानिया स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की।
मुख्यमंत्री धामी ने दोनों नन्हे पर्वतारोहियों को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटी का सफल आरोहण करना बच्चों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और मेहनत को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि रियांश और प्रिशा ने अपनी उपलब्धि से न केवल अपने परिवार और क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। इससे युवा पीढ़ी को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्हें हासिल करने की प्रेरणा मिलेगी।
5,895 मीटर ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा-
गौरतलब है कि 9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत, अल्मोड़ा जनपद के चीनाखान निवासी हैं, जबकि 10 वर्षीय प्रिशा रावत, नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव की रहने वाली हैं। दोनों नन्हे पर्वतारोहियों ने 22 अगस्त 2026 को समुद्र तल से 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण कर वहां तिरंगा फहराया था।
कम उम्र में इस कठिन पर्वत चोटी को फतह करना दोनों बच्चों की असाधारण इच्छाशक्ति और पर्वतारोहण के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि से उत्तराखंड के साहसिक खेलों और पर्वतारोहण की समृद्ध परंपरा को भी नई पहचान मिली है।
युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित कर रही सरकार-
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेलकूद और विभिन्न साहसिक गतिविधियों के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप मंच मिले, ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर नई ऊंचाइयों को छू सकें।
रियांश पंत और प्रिशा रावत की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसले और सपने बड़े हों तो दुनिया की ऊंची से ऊंची चोटी भी हासिल की जा सकती है।







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