ऋषिकेश/हरिद्वार, 27 अगस्त 2026 — देवभूमि जेके न्यूज़ डेस्क
देश में 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक 41वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है, और हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र से इस अवसर पर एक उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। स्थानीय “दृष्टिदूतों” के आग्रह पर हाल के दिनों में 11 परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के बाद नेत्रदान कराया — यानी 22 कॉर्निया, जो कॉर्नियल अंधता से पीड़ित 22 लोगों की दुनिया रोशन कर सकते हैं।
एक परिवार, तीन पीढ़ियां, एक संकल्प
नेत्रदान कार्यकर्ता और लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने कुछ ऐसे परिवारों के बारे में बताया, जिनकी कहानी मिसाल है। हरिद्वार के हरनारायण आहूजा ने पत्नी के निधन पर पहले उनका नेत्रदान कराया और उसके बाद बेटी को सूचना दी, ताकि भावुक होकर वह मना न कर दे। बाद में जब स्वयं हरनारायण जी का निधन हुआ, तो उसी बेटी ने खुद आगे बढ़कर पिता के नेत्रदान का आग्रह किया।
टक्कर परिवार ने पहले लायन ललित नारायण मिश्रा के कहने पर श्रीमती प्रकाश टक्कर का नेत्रदान कराया था; गत मंगलवार को प्रिंस मनचंदा के निवेदन पर उसी परिवार ने विनोद टक्कर का भी नेत्रदान कराया। गुलशन नारंग, जो पहले अपनी दादी और पिता का नेत्रदान करा चुके हैं, ने अब माता श्रीमती कविता नारंग का नेत्रदान कराया। नजफगढ़ (दिल्ली) के कृष्ण कालरा ने श्रीमती सरला अरोड़ा के निधन पर नेत्रदान कराया। पूर्व अध्यापक भुवनेश्वर आनंद कुकरेती के परिजनों ने उनके देहदान के साथ नेत्रदान का संकल्प भी पूरा किया।
कार्यकर्ताओं के आग्रह पर आगे आए परिवार
रोटेरियन सुरेश सूरी (निदेशक, श्री एंटरप्राइजेज) के आग्रह पर दिनेश रामपाल का, लायन राजेश अग्रवाल के आग्रह पर अवतार सिंह का, हरिद्वार के अनिल अरोड़ा के आग्रह पर ईशा नारंग का, और प्रेमनगर के अमित भाटिया के आग्रह पर श्रीमती मनजीत भारद्वाज और राज भाटिया का नेत्रदान परिजनों ने कराया।
रामशरण चावला का मिशन: 480 नेत्रदान
हरिद्वार-ऋषिकेश में नेत्रदान की अलख जगाने वाले रामशरण चावला के मिशन के तहत अब तक 480 व्यक्तियों का नेत्रदान कराया जा चुका है। यह अभियान लगातार जारी है, और इसका लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर कॉर्नियल अंधता के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है।
नेत्रदान के बारे में ज़रूरी बातें
नेत्रदान मृत्यु के बाद ही होता है और इसे मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कराना होता है, इसलिए नज़दीकी नेत्र बैंक का नंबर पहले से पास रखें। चश्मा पहनने वाले, मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके या किसी भी उम्र के व्यक्ति नेत्रदान कर सकते हैं। दान में पूरी आंख नहीं, केवल कॉर्निया लिया जाता है, जिससे चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती और अंतिम संस्कार में कोई बाधा नहीं होती। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिल सकती है। सबसे ज़रूरी बात — अपने संकल्प के बारे में परिवार को बताएं, क्योंकि अंतिम निर्णय परिजनों का होता है। पखवाड़े के दौरान हिम्स जौलीग्रांट में भी जागरूकता कार्यक्रम चल रहे हैं।







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