उत्तराखंड

प्याज फिर रुलाने को तैयार? ‘कांदा एक्सप्रेस’ से बफर स्टॉक रवाना, ₹35 किलो में मिलेगा सरकारी प्याज — जानिए क्यों भारत की राजनीति और रसोई दोनों हिलाता है प्याज

देवभूमि जेके न्यूज़ डेस्क, 26 अगस्त 2026 चीनी और खाद्य तेल के दामों में उछाल के बाद अब प्याज ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू…

देवभूमि जेके न्यूज़ डेस्क, 26 अगस्त 2026

चीनी और खाद्य तेल के दामों में उछाल के बाद अब प्याज ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। ऋषिकेश-देहरादून की मंडियों में भी प्याज के भाव चढ़े हैं और ग्राहक परेशान हैं। लेकिन इस बार स्थिति गंभीर होने से पहले ही केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाला है — नासिक से सरकारी बफर स्टॉक “कांदा एक्सप्रेस” के ज़रिए देश के बड़े शहरों में भेजा जा रहा है और रियायती दर पर प्याज बेचा जाएगा। इस लेख में समझिए कि सरकार क्या कर रही है, आपकी जेब पर क्या असर होगा, और प्याज भारत में हमेशा इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन जाता है।

सरकार का प्लान: कांदा एक्सप्रेस और ₹35 किलो प्याज

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने 24 अगस्त को बताया कि महाराष्ट्र के नासिक में रखे सरकारी बफर स्टॉक से प्याज रेल रैक — “कांदा एक्सप्रेस” — के ज़रिए प्रमुख खपत केंद्रों तक भेजा जाना शुरू हो गया है। पहले चरण में खेप चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी भेजी जा रही है। यह प्याज थोक और खुदरा दोनों बाज़ारों में उतारा जाएगा, और एनसीसीएफ (राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ) तथा नेफेड जैसी सरकारी एजेंसियां खुदरा में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज बेचेंगी।

सरकार के पास इस साल के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जिसे अधिकारी घरेलू मांग के लिए पर्याप्त बता रहे हैं। उनका अनुमान है कि आने वाले महीनों में उपलब्धता संतोषजनक रहेगी। यह बफर स्टॉक नेफेड और एनसीसीएफ के ज़रिए इसी मकसद से बनाया जाता है — आपात स्थिति और त्योहारों के मौसम में कीमतों को काबू में रखना।

जमाखोरों पर शिकंजा

कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार आमतौर पर एक साथ कई कदम उठाती है, और इस बार भी वही रणनीति दिख रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्यों को थोक और खुदरा व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट तय करने और अवैध भंडारण पर छापेमारी के निर्देश दिए गए हैं। ज़रूरत पड़ने पर निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य या पूरी रोक लगाई जाती है, और आयात आसान बनाने के लिए सीमा शुल्क घटाया जाता है। रियायती प्याज मोबाइल वैन और सरकारी आउटलेट के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है।

आपकी थाली पर असर

यह महंगाई सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। एक सामान्य भारतीय परिवार के मासिक खर्च में खाने-पीने की हिस्सेदारी 40 से 50 प्रतिशत तक होती है। जब प्याज, चीनी, दाल और खाद्य तेल जैसी बुनियादी चीज़ें महंगी होती हैं, तो निम्न और मध्यम वर्ग को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ज़रूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। कई परिवार सब्ज़ियों और दालों का उपयोग घटा देते हैं, जिसका सीधा असर बच्चों और महिलाओं के पोषण पर पड़ता है।

प्याज ने कब-कब हिलाई सरकारें

भारत में प्याज सिर्फ सब्ज़ी नहीं, एक राजनीतिक कारक रहा है। 1980 के आम चुनाव को “प्याज चुनाव” कहा जाता है — जनता पार्टी सरकार के दौर में प्याज के दाम आसमान छू रहे थे, इंदिरा गांधी ने इसे मुख्य मुद्दा बनाया और प्याज की माला पहनकर प्रचार किया; नतीजा, कांग्रेस की सत्ता में वापसी। 1998 में महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेमौसम बारिश से फसल तबाह हुई और दिल्ली-राजस्थान विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ दल को हार झेलनी पड़ी। 2010 में नासिक में खरीफ फसल खराब होने पर तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को पाकिस्तान से प्याज मंगाना पड़ा, निर्यात रोकना पड़ा और सीमा शुल्क शून्य करना पड़ा। 2013 में मानसून की अनिश्चितता और बिचौलियों की साठगांठ से दाम बढ़े तो विपक्ष सड़कों पर उतरा। 2019 का संकट सबसे बड़ा था — मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बाढ़ से मंडियों में रखा लाखों टन प्याज सड़ गया और सरकार को तुर्की, मिस्र और अफगानिस्तान से आयात के साथ देशव्यापी स्टॉक लिमिट लगानी पड़ी।

कहां से तय होता है प्याज का भाव

नासिक (महाराष्ट्र) एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है और पूरे देश के थोक भाव यहीं की आवक और बोली से तय होते हैं। गुजरात की महुआ मंडी सफेद प्याज और डीहाइड्रेशन (सूखा प्याज पाउडर) उद्योग के लिए जानी जाती है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश के दर्जनों जिले भी बड़े उत्पादक हैं। उत्तराखंड अपनी ज़रूरत का अधिकांश प्याज इन्हीं राज्यों से मंगाता है, इसलिए नासिक में भाव बढ़ते ही देहरादून-ऋषिकेश की मंडियों में असर दिखने लगता है।

उपभोक्ताओं के लिए सुझाव

अगर आपके शहर में एनसीसीएफ या नेफेड की मोबाइल वैन या आउटलेट है, तो वहां से ₹35 किलो का प्याज खरीदा जा सकता है। थोक में खरीदकर ठंडी, हवादार जगह पर रखने से प्याज कई हफ्ते चलता है। और अगर किसी दुकानदार पर जमाखोरी का संदेह हो, तो जिला आपूर्ति कार्यालय में शिकायत की जा सकती है।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1
Discussion

0 Comments

Join the conversation

Share your view on this story. Your email address will not be published.