अंतर्राष्ट्रीय

*धर्म संस्कृति संगम द्वारा “भारत सर्वधर्म संभाव की जननी” का हुआ आयोजन*

डेस्क-बोधगया- धर्म संस्कृति संगम द्वारा भारत सर्वधर्म संभाव की जननी है विषय पर आयोजित बौद्धिक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि हर पल…

डेस्क-बोधगया- धर्म संस्कृति संगम द्वारा भारत सर्वधर्म संभाव की जननी है विषय पर आयोजित बौद्धिक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि हर पल नये वातावरण से जो ज्ञान मिलता है वह आनंददायक है. धर्म वही है जो लोगों के मन के अंदर एक-दूसरे के प्रति निकटता प्रदान करे. वैमनस्यता का बोध कभी धर्म नहीं हो सकता है. पूर्व मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति विभिन्न धर्मों का संगम है. भारत विश्व का एकमात्र देश है जहां सभी धर्म के उपासक एक साथ शांति से रह रहे हैं. डॉ कुमार ने कहा कि धर्म के साये में धर्मांतरण का प्रयास हो रहा है, इससे सचेत रहने की जरूरत है. मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक धर्म संस्कृति संगम के संस्थापक डॉ इंद्रेश कुमार ने कहा कि एक दशक से चीवरदान कार्यक्रम चल रहा है. अब इसके इतिहास लिखने की जरूरत है कि बोधगया और गया एक प्रतीक स्थापित करेगा. उन्होंने कहा कि छुआछूत से मुक्ति का संदेश भारत ही देगा. भारत का समाज सत्ता आधारित नहीं है. भारत की नियति सब को साथ लेकर चलने की है. उन्होंने कहा कि मैंने बौद्ध धर्म के दोनों प्रमुख पंथों के साथ बैठक की है. वहां दोनों ने मुझे वर्ल्ड पीस बुद्धिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया. हमें बचपन से ही संदेश मिला कि धर्मो में भेद नहीं है. किसी ने नहीं कहा कि नफरत से आपकी जिंदगी खुशहाल होगी. भारत सभी धर्मों के सम्मान की सुंदर भूमि है. आठ आर्य सत्य को विस्तार से बताया.

उत्तराखंड संत समाज के अध्यक्ष एवं कृषणायन देशी गोरक्षाशाला के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास जी महाराज ने कहा कि भारतवर्ष ऐसी पुण्य भूमि है जहां पक्षी जटायु को भी धर्म और संस्कृति का ज्ञान है, जटायु को जब अवसर मिला तो उन्होंने अपने धर्म को बखूबी समझते हुए अपना धर्म निभाया।
धर्म संस्कृति का एक जटिल हिस्सा है, और दोनों कई तरीकों से एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। धर्म “वास्तव में” या “हमेशा” किस बारे में है, इसकी पहचान करना असंभव है।
लाओ बोधगया इंटरनेशनल बौद्ध मठ के मुख्य पुजारी साईसाना बोधवांग ने कहा कि मैं लाओस से एक दशक पहले बोधगया आया और आज मुझे यह मातृभूमि समान लग रहा है. की नोट स्पीकर डॉ एकता वर्मा ने धर्म और संस्कृति की उत्पति को विस्तार से रखी. मंच संचालन अनूप केडिया ने की. होटल डेल्टा इंटरनेशनल में आयोजित संगोष्ठी में नार्थ बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति काशी नाथ सिंह, विशिष्ठ अतिथि केंद्रीय उच्चतर तिब्बती शिक्षा संस्थान वाराणसी के कुलपति प्रोफेसर वांगचुंग नेगी, धर्म संस्कृति संगम के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाहक मोहन सिंह , नगर पार्षद अध्यक्ष ललिता देवी, महासचिव डॉ राघा कृष्ण मिश्र, प्रो शमीर कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष माधवी तिवारी, मीडिया प्रभारी संजय यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश चिंटू, पूर्व विधायक डॉ श्यामदेव पासवान सहित सभी लोग मौजूद थे.

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