ऋषिकेश

ऋषिकेश-प्रकाश आश्रम में धूमधाम से मनाया गया डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव।

देवभूमि जेके न्यूज | ऋषिकेश, 16 अक्टूबर 2026। ऋषिकेश। धर्मनगरी ऋषिकेश के शीशम झाड़ी स्थित प्रकाश आश्रम में डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति…

ऋषिकेश-प्रकाश आश्रम में धूमधाम से मनाया गया डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव।

देवभूमि जेके न्यूज | ऋषिकेश, 16 अक्टूबर 2026।

ऋषिकेश। धर्मनगरी ऋषिकेश के शीशम झाड़ी स्थित प्रकाश आश्रम में डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जन्मोत्सव के अवसर पर आश्रम परिसर में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कीर्तन, पूजा-अर्चना, आरती और संतों के प्रवचनों से आश्रम का वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं ने पहुंचकर डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर आध्यात्मिक सेवा की मंगलकामना की।

जन्मोत्सव के दौरान आश्रम में श्रद्धालुओं और संतों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच ईश्वर की आराधना की गई तथा भजन-कीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना, सद्भाव और भक्ति का संदेश दिया गया। संतों ने अपने प्रवचनों में भारतीय सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा, सेवा, त्याग, करुणा और परोपकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों का जीवन समाज को सद्मार्ग दिखाने और मानवता के कल्याण के लिए प्रेरित करने वाला होता है।

संतों ने कहा कि जन्मोत्सव केवल किसी व्यक्ति के जीवन का उत्सव नहीं, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और समाज के प्रति योगदान को स्मरण करने का अवसर भी है। ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के साथ ही समाज में प्रेम, एकता, सद्भाव और सेवा भावना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा, संस्कार और परिश्रम पर दिया जोर

जन्मोत्सव के अवसर पर डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने अपने संदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर परिश्रम करने, अनुशासन अपनाने और अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

महाराज ने कहा कि बच्चे देश और समाज का भविष्य हैं। उनके भीतर छिपी प्रतिभा को सही दिशा देना और उन्हें अच्छे संस्कारों से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल इच्छाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन इच्छाओं को साकार करने के लिए नियमित प्रयास, लगन, धैर्य और आत्मविश्वास भी आवश्यक हैं। जो विद्यार्थी कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं, वे निश्चित रूप से जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग खोज लेते हैं।

उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वास्तविक शिक्षा वह है, जो व्यक्ति को विवेकशील, विनम्र, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाए। बच्चों को अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए तथा जीवन में सदैव सत्य, ईमानदारी और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए।

महाराज ने कहा कि आधुनिक समय में बच्चों के सामने आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं। ऐसे में उन्हें अपनी ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए अध्ययन, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और समाजोपयोगी कार्यों में रुचि लेनी चाहिए। निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। असफलता व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर देती है। इसलिए प्रत्येक बच्चे को अपने भीतर आत्मविश्वास विकसित करना चाहिए और अपने माता-पिता तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन में अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

महाराज ने सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने आचरण और कर्मों से परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनना भी है। सेवा, करुणा, परोपकार और सद्भाव जैसे गुण व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाते हैं।

विशाल भंडारे में संतों, महामंडलेश्वरों और स्कूली बच्चों ने ग्रहण किया प्रसाद

जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों, श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों सहित अनेक लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे के माध्यम से सेवा और समर्पण की भावना को अभिव्यक्त किया गया।

सनातन परंपरा में अन्नदान को विशेष पुण्य का कार्य माना गया है। इसी भावना के अनुरूप आयोजित भंडारे में लोगों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सेवा और प्रसाद वितरण ने जन्मोत्सव के आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

इस अवसर पर उपस्थित संतों ने कहा कि अन्नदान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे आयोजन समाज में परस्पर सहयोग, आत्मीयता और समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। संतों ने डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उनके आध्यात्मिक कार्यों और समाज को दिए जा रहे संदेशों की सराहना की।

संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई आयोजन की शोभा

डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज के 77वें जन्मोत्सव पर देशी गौरक्षाशाला, गैंडीखाता, हरिद्वार के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास जी महाराज, ब्रह्मपुरी से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद जी महाराज, महंत रवि शास्त्री, महंत विनय सारस्वत, प्रदीप शर्मा, जयराम आश्रम से राम चौबे, पुजारी सर्वेश्वर दास जी महाराज, राजमोहन नौटियाल और पवन दास जी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।

सभी संतों ने डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की। आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों और विशाल भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं ने गुरुजनों के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

समग्र रूप से डॉ. स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज का 77वां जन्मोत्सव भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन, सेवा और संस्कारों के संदेश के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने एक बार फिर सनातन परंपरा में संतों के मार्गदर्शन, बच्चों को संस्कारित करने और समाज में सेवा भावना को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित किया।

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