देवभूमि जे के न्यूज, ऋषिकेश। उत्तराखंड की राजनीति में रविवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री स्तर के दर्जाधारी रमेश चंद्र उनियाल ने करीब चार दशक लंबे राजनीतिक रिश्ते को विराम देते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और पार्टी के सभी दायित्वों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। मुनिकीरेती-ढालवाला क्षेत्र से लंबे समय से सक्रिय राजनीति और जनसेवा में जुड़े उनियाल के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
अपने इस्तीफे में उनियाल ने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें संगठन के भीतर संवाद और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर गंभीर चुनौतियां महसूस हो रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के साथ व्यक्तिगत मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच, जनसेवा की प्राथमिकताओं और मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
उनियाल ने अपने पत्र में अपने करीब 40 वर्ष के राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया है। उन्होंने वर्ष 1985 में युवक कांग्रेस मुनिकीरेती से सक्रिय राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 1985 से 1987 तक युवक कांग्रेस मुनिकीरेती इकाई के अध्यक्ष, 1987 से 1989 तक शहर कांग्रेस कमेटी मुनिकीरेती के अध्यक्ष और 1989 से 1992 तक जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल सेवादल के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1992 से 1995 तक जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
राजनीतिक संगठन में उनकी सक्रियता इसके बाद भी लगातार बनी रही। वर्ष 1995 से 2000 तक उन्होंने प्रदेश संगठन मंत्री कांग्रेस सेवादल उत्तर प्रदेश, 2000 से 2002 तक प्रदेश संगठक कांग्रेस सेवादल उत्तराखंड तथा 2002 से 2004 तक अतिरिक्त मुख्य संगठक प्रदेश कांग्रेस सेवादल के रूप में जिम्मेदारी निभाई। लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में भी उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में भूमिका निभाई।
राज्य मंत्री स्तर की जिम्मेदारी भी संभाली
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में फरवरी 2014 से मार्च 2016 तक रमेश चंद्र उनियाल ने उच्च शिक्षा विभाग में उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री स्तर की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वह जिला सहकारी बैंक हल्द्वानी तथा उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक में निर्वाचित निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2005 से वह मणिकूट हिमालय परिक्रमा समिति के अध्यक्ष/संयोजक के रूप में भी सक्रिय हैं।
‘एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाकर खुद को सीमित नहीं करना चाहता’
इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या रमेश चंद्र उनियाल किसी दूसरे राजनीतिक दल का दामन थामेंगे। अपने पत्र में उन्होंने फिलहाल इस संभावना पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि वह एक पार्टी से इस्तीफा देकर तत्काल दूसरी पार्टी की सदस्यता लेकर खुद को सीमित नहीं करना चाहते।
उनियाल के अनुसार, उनके अधिकांश साथियों का मत था कि कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद उन्हें सत्ताधारी पार्टी के मंच से जुड़ जाना चाहिए, लेकिन वह इस राय से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल का उम्मीदवार सक्षम और श्रेष्ठ हो सकता है और वह केवल अच्छे एवं सक्षम उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में उनका किसी दल में तत्काल शामिल न होकर स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका की बात कहना क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
‘दिखावे के लिए पार्टी में नहीं रहा’
अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उनियाल ने संकेत दिया कि कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव केवल पद अथवा राजनीतिक लाभ तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने संगठन में रहते हुए वर्षों तक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से मिले सहयोग एवं अनुभव को हमेशा सम्मान के साथ याद रखेंगे।
उन्होंने कहा कि 40 वर्ष का रिश्ता समाप्त करना आसान नहीं होता, लेकिन समय-समय पर परिस्थितियों और तथ्यों की समीक्षा करना आवश्यक है। इस्तीफे के बाद उन्होंने अपने पत्र के अंतिम हिस्से में कहा कि अब वह खुद को पहले से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं।
रमेश चंद्र उनियाल के इस्तीफे से खासतौर पर ऋषिकेश, मुनिकीरेती और टिहरी गढ़वाल क्षेत्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के एक पुराने और अनुभवी संगठनात्मक चेहरे के पार्टी से अलग होने के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका क्या होती है और आगामी चुनाव में वह किस दिशा में अपना समर्थन देते हैं। फिलहाल उन्होंने किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।






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