देवभूमि जेके न्यूज, ऋषिकेश, 2 अक्टूबर। निर्मल आश्रम, ऋषिकेश में संचालित हरि कृपा सिलाई केंद्र की ओर से जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को संस्था की ओर से पिछले एक वर्ष के दौरान निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 23 जरूरतमंद लड़कियों एवं महिलाओं को सिलाई मशीन, प्रशस्ति पत्र और प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में निर्मल आश्रम संस्था के अध्यक्ष परम पूज्य महंत बाबा राम सिंह महाराज एवं सचिव संत जोध सिंह महाराज ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को सिलाई मशीन एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को केवल सहायता उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे ऐसा हुनर प्रदान करना आवश्यक है, जिसके माध्यम से वह अपने पैरों पर खड़ा होकर सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके। हरि कृपा सिलाई केंद्र इसी उद्देश्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है।
हरि कृपा सिलाई केंद्र में प्रत्येक वर्ष गरीब और असहाय महिलाओं एवं युवतियों को एक वर्ष का पूर्णतया निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें सिलाई मशीन भी प्रदान की जाती है, ताकि वे घर से ही सिलाई का कार्य शुरू कर अपनी आजीविका अर्जित कर सकें। इस पहल से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का अवसर मिल रहा है।
संस्था की ओर से बताया गया कि सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं सिलाई-कढ़ाई के कार्य को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे सकती हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य निर्धन, असहाय और जरूरतमंद महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
सिलाई मशीन प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। महिलाओं ने संस्था के इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निःशुल्क प्रशिक्षण और सिलाई मशीन मिलने से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है।
कार्यक्रम में एस. एन. सूरी, रेनू सूरी, हरमनप्रीत सिंह, दिनेश शर्मा, गुरजिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, चरणजीत सिंह सहित सिलाई केंद्र की मुख्य संचालिका बीबी परमजीत कौर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को आगे भी अपने हुनर का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।






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