देवभूमि जे के न्यूज, देहरादून, 30 सितम्बर 2026। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में 25 बिंदु कार्यक्रम के तहत प्रदेश में संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं की सफलता का आंकलन केवल निर्धारित लक्ष्यों और कागजी प्रगति के आधार पर न किया जाए, बल्कि यह भी देखा जाए कि योजनाओं का धरातल पर कितना प्रभाव पड़ा है और आमजन को उनका वास्तविक लाभ कितना मिल रहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की वास्तविक सफलता तभी मानी जानी चाहिए, जब उसका सकारात्मक प्रभाव लाभार्थियों के जीवन में दिखाई दे। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं से जुड़े आंकड़ों के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का भी नियमित रूप से मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।
पिरूल कलेक्शन से आय बढ़ने का होगा आकलन
मुख्य सचिव ने पिरूल कलेक्शन योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अब तक पिरूल संग्रहण से कितने लाभार्थियों को आर्थिक लाभ मिला है, कितनी मॉनेटाइजेशन हुई है और इससे लोगों की आय में कितना इजाफा हुआ है, इसका विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना के तहत किए गए कार्यों की संख्या के साथ यह जानकारी भी उपलब्ध होनी चाहिए कि इससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया।
उन्होंने अधिकारियों को लाभार्थियों से संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने और योजना के वास्तविक प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करने को कहा।
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और सेग्रिगेशन व्यवस्था पर जोर
बैठक में प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन तथा कचरे के पृथक्करण यानी सेग्रिगेशन की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि केवल घरों से कचरा उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके पृथक्करण, परिवहन और अंतिम निस्तारण तक पूरी व्यवस्था की नियमित निगरानी आवश्यक है। स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों को इस व्यवस्था में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए गए।
प्रदेश के सभी एसटीपी की होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी से संबंधित कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों और सचिव पेयजल को एसटीपी की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित एसटीपी की क्षमता के अनुरूप उनका अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी एसटीपी की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए प्रभावी एवं केंद्रीयकृत मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए। इस व्यवस्था के माध्यम से एसटीपी के संचालन, क्षमता के उपयोग और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि एसटीपी की क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद यदि उनका पूर्ण उपयोग नहीं हो रहा है तो इसके कारणों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। संबंधित विभागों को एसटीपी से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
बड़े संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग में एसटीपी की नियमित जांच
मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े कमर्शियल संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में स्वयं के एसटीपी की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि संबंधित संस्थानों में एसटीपी के संचालन और निर्धारित मानकों के पालन की नियमित जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सीवेज का बिना उपचार के निस्तारण न हो और पर्यावरणीय मानकों का पालन प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जा सके।
अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जे पर भी निगरानी
बैठक में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकारी भूमि और सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्रवाई के बाद उन्हीं स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण न हो।
उन्होंने जिलास्तर पर नियमित निगरानी की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
लंबित पार्किंग योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
जनपदों में पार्किंग विकसित किए जाने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने लंबित योजनाओं की प्रगति में तेजी लाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन योजनाओं में भूमि, स्वीकृति, वित्तीय अथवा अन्य किसी कारण से विलंब हो रहा है, उन मामलों की स्पष्ट पहचान कर संबंधित स्तर पर समाधान किया जाए, ताकि योजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
हर माह होगी 25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जनपदों में 25 बिंदु कार्यक्रम की नियमित मासिक समीक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समीक्षा प्रक्रिया केवल आंकड़ों और लक्ष्य पूर्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक बैठक में योजनाओं की जमीनी स्थिति, वास्तविक लाभार्थियों को मिल रहे लाभ, योजनाओं के प्रभाव और सामने आ रही समस्याओं की भी समीक्षा की जाए। जिन बिंदुओं पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, वहां देरी के कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि विभागों को अपनी योजनाओं की प्रगति के साथ उनके परिणामों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शी, परिणाम आधारित और समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने की अपेक्षा की।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डेय सहित संबंधित विभागों के सचिव, अपर सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





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