उत्तराखंड

*विश्व के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं ने कुंडलिनी तंत्र योग साधना से हुए रुबरु*

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) - विश्व के विभिन्न देशों से श्रद्धालु कुंडलिनी तंत्र योग साधना में सहभागी हो रहे हैं, जो International Samarpan Yoga Awareness Foundation…

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) – विश्व के विभिन्न देशों से श्रद्धालु कुंडलिनी तंत्र योग साधना में सहभागी हो रहे हैं, जो International Samarpan Yoga Awareness Foundation तथा Swami Samarpan Ashram में आयोजित की जा रही है। इस साधना का दिव्य मार्गदर्शन अवधूत गुरु स्वामी समर्पणानन्द जी महाराज द्वारा किया जा रहा है।

वर्तमान में गुरुजी गहन पंचाग्नि साधना और मौन साधना में स्थित हैं, फिर भी उनकी आध्यात्मिक शक्ति और संकल्प से साधकों को निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। गुरुजी के निर्देशों के अनुसार यह साधना उनके प्रमुख शिष्यों योगाचार्य कपिल बिष्ट और योगचारिणी अनामिका के माध्यम से संचालित हो रही है, जो साधकों को विधिवत अभ्यास, ध्यान और आंतरिक साधना की प्रक्रिया में मार्गदर्शन दे रहे हैं।

कुंडलिनी योग का विज्ञान मानव के भीतर सुप्त पड़ी दिव्य शक्तियों को जागृत करने का मार्ग है। यह साधना मस्तिष्क और चेतना की विभिन्न क्षमताओं को सक्रिय करने में सहायक होती है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में जागरूकता, नैतिकता और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त कर सके।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में इस ज्ञान की झलक हमें महाभारत में भी मिलती है, जहाँ अर्जुन द्वारा चक्रव्यूह का रहस्य बताया गया था, जिसे अभिमन्यु ने अपनी माता के गर्भ में रहते हुए सुना था। यह कथा सूक्ष्म चेतना और ज्ञान की गहराई को दर्शाती है।

यद्यपि आज कुंडलिनी योग विश्वभर में लोकप्रिय हो रहा है, फिर भी इसका वास्तविक स्वरूप अत्यंत गूढ़ और रहस्यमय माना जाता है। इस विद्या का सही मार्गदर्शन केवल एक अनुभवी और सिद्ध गुरु ही प्रदान कर सकता है। अवधूत गुरु स्वामी समर्पणानन्द जी महाराज कुंडलिनी योग और तंत्र के ऐसे ही प्रामाणिक आचार्य हैं, जो पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से योग, तंत्र और वेदांत की प्राचीन भारतीय परंपरा का प्रसार कर रहे हैं।

गुरुजी ने अब तक 6 महाद्वीपों और 56 देशों की यात्रा कर विश्वभर में योग और आध्यात्मिक साधना का संदेश पहुँचाया है। भारत प्राचीन काल से ही वेद, योग और सनातन ज्ञान की भूमि रहा है, इसलिए इसे विश्व गुरु कहा जाता था। आज पुनः भारत अपनी आध्यात्मिक परंपराओं के माध्यम से विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखता है और भविष्य में भी मानवता के कल्याण का पथ प्रदर्शित करता रहेगा।

अवधूत गुरु स्वामी समर्पणानन्द जी महाराज ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों से साधक निरंतर कुंडलिनी तंत्र योग साधना के लिए आ रहे हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, अर्जेंटीना, अमेरिका, रूस, यूक्रेन और ग्रीस सहित अनेक देशों से श्रद्धालु साधना में सहभागी हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यद्यपि इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है, फिर भी कुंडलिनी योग और तंत्र साधना का प्रवाह कभी समाप्त नहीं होता। यह साधना किसी एक कार्यक्रम या उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साधक के जीवन में निरंतर चलने वाली आंतरिक जागरण की दिव्य प्रक्रिया है।

आज भी स्वामी समर्पण आश्रम में चल रही यह साधना विश्वभर के साधकों को आंतरिक चेतना, आत्मिक शांति और कुंडलिनी जागरण के मार्ग पर अग्रसर कर रही है।

कुंडलिनी योग और तंत्र कोई एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन भर चलने वाली साधना की दिव्य यात्रा है। 🙏

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