*आयुर्वेद स्वास्थ्य सेवा में समतापूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद करता है-डॉ डी के श्रीवास्तव*

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश- 13 अक्टूबर आज की दुनिया को आयुर्वेद की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यह समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें मन, शरीर और आत्मा के संतुलन पर जोर दिया जाता है, न कि केवल लक्षणों के इलाज पर। यह प्राकृतिक उपचार, पोषण और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से बीमारियों की रोकथाम और इलाज करता है, जिससे स्वस्थ , आनंदित और संतुलित जीवन संभव होता है। इसके अलावा, आयुर्वेद स्वास्थ्य सेवा में समतापूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद करता है-उक्त विचार ऋषिकेश स्थित नवजीवनम आयुर्वेद संस्थान के अंतरराष्ट्रीयआयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ डी के श्रीवास्तव ने यूरोप के अपने एक माह के आयुर्वेदा वर्कशॉप के सफल आयोजन को समाप्त कर अपने देश वापस आने पर बताया , डॉ श्रीवास्तव पिछले एक माह से यूरोप के देश होलैंड्स (नीदरलैंड), बेल्जियम और जर्मनी में यूरोपियन एजुकेशन फ़ॉर आयुर्वेद के द्वारा आयोजित आयुर्वेद के विभिन्न कार्यक्रम में प्रतिभाग कर वापस आये है ! डॉ श्रीवास्तव ने भारत के राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर को यूरोप के देश जर्मनी के राजधानी बर्लिन और नीदरलैण्ड के हुलस्ट में भी आयोजित कर वहा के लोगों को स्वास्थ्य जीवन हेतु आयुर्वेद की उपयोगिता और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा किये जा रहे शोध और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी सुलभ कराई जिससे यूरोपियन नागरिकों में काफी उत्सुकता रही तथा उन्होंने इसकी सराहना भी की जिससे भविष्य में सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की आवश्यक्ता को महत्वपूर्ण माना गया
आज विश्व के चिकित्सा वैज्ञानिक और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने समग्र स्वास्थ्य के दृष्टिकोण हेतु आयुर्वेद जो पूरे व्यक्ति (शरीर, मन और आत्मा) पर ध्यान केंद्रित करता है को महत्व दे रहा है, जो आधुनिक चिकित्सा से अलग एक संपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है।डब्लू एच ओ ने आयुर्वेद को एक चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता दे रखी है जिससे इसको वैश्विक स्वीकृति और एकीकरण को बढ़ावा मिला है ।
आयुर्वेद केवल रोग होने पर इलाज नहीं करता, बल्कि जीवनशैली में बदलाव, पोषण और हर्बल उपचारों के माध्यम से रोगों को पहले से रोकने पर भी जोर देता है। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि आयुर्वेद के सिद्धांत  स्वास्थ्य सेवा में एक समतापूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है और दवा उद्योग के बढ़ते प्रभाव के प्रति एक विकल्प प्रदान करता है, जो इसे अधिक सुलभ और संतुलित बनाता है।
पंचकर्म एवं हेरबोलोजिस्ट डॉ निवेदिता श्रीवास्तव ने भी यूरोप की कार्य शालाओं में व्याख्यान देते हुए बताया कि आयुर्वेद जड़ी-बूटियों, खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करता है, जो इसे प्राकृतिक उपचारों की तलाश करने वालों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाता है।
 आयुर्वेद का दृष्टिकोण मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संबंध को पहचानता है, जो एक समग्र और टिकाऊ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।  डॉ डी के श्रीवास्तवा पिछले कई वर्षों से विश्व के अनेक देशों में आयुर्वेद व्याख्यान एवं चिकित्सा हेतु आमंत्रित किये जाते हैं जहाँ वो *आयुर्वेदम् शरणं गच्छामि* के अपने विज़न और मिशन को कामयाब कर भारत देश का गौरव बढ़ा रहे हैं । डॉ श्रीवास्तवा के सफलतापूर्वक आयुर्वेद , उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन करने पर ऋषिकेश आयुर्वेद डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ डीपी वलोदी एवं समस्त चिकित्सकों ने स्वागत एवं सम्मान किया

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