*“भारतीय शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है।”*

देवभूमि जे के न्यूज़-

नई दिल्ली/
आज जब हम भारतीय ज्ञान परंपरा पर बात करते हैं और और आदरणीय प्रधानमंत्री जी की विकसित भारत की संकल्पना को सामने रखकर आगे बढ़ रहे हैं तब उसी के समानांतर हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को भी संरक्षित रखने की आवश्यकता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है। आवश्यकता इस बात की है हम सब अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर सजग रहें और अपनी नई पीढ़ी तक उसे पहुंचाएँ। ग्वालियर घराने के ख्यातिलब्ध संगीतज्ञ और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक डॉ गुंजन कुमार झा ने यह बातें डाबरी स्थित शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान के कार्यालय में ‘दिल्ली संगीत संकल्प’ द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में कही।

अध्यक्षीय वक्तव्य में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. रवि शर्मा ने कहा कि सभी सरकारों को शास्त्रीय संगीत के विकास, संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध करवानी चाहिए। डॉ॰ मधुरलता भटनागर ने कहा कि मुकेश गर्ग जी के सपनों को पूरा करने के नई पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत साधना के प्रति रुचि जगानी होगी। संगीतकार पंडित प्रभात कुमार ने कहा कि आज के समय में शास्त्रीय संगीत के साधकों को समाज और सरकार से घोर उपेक्षा हो रही है जिसके कारण संगीत साधकों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। शास्त्रीय गायिका डॉ मल्लिका बैनर्जी एवं डॉ. ऋचा जैन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत परम्परा के लिए परम्परागत गुरु परम्परा के साथ साथ विश्वविद्यालयों में संगीत की सही तालीम को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया और अच्छे गुरुओं की जरूरत बताई।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए, संस्था की अध्यक्ष ऋचा माथुर जी ने कहा कि संगीत संकल्प संस्था की प्राथमिकता साधनारत कलाकारों को मंच देना और नई पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत परम्परा के प्रति जागरूकता व रुचि पैदा करना है। यह संस्था डॉ॰ मुकेश गर्ग जी के विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करने के लिए कटिबद्ध है। साथ ही डॉ॰ मुकेश गर्ग जी की पुस्तकों व लेखों का अध्ययन करने की बात कही। सुप्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार के॰डी॰पाठक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि भारतीय संगीत परम्परा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार मदद करे। कार्यक्रम में श्री किशन सिंह, सुश्री ऋतम्भरा जी , डॉ. नेहा गौड़, श्री प्रमोद कुमार जी सहित कई गण मान्य लोगों ने भाग लिया और स्व. मुकेश गर्ग जी की स्मृतियों को साझा किया।

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