देवभूमि जेके न्यूज़ — राशिफल डेस्क | रविवार, 23 अगस्त 2026
रविवार सूर्य का दिन है — ऊर्जा और आत्मबल का। छुट्टी का दिन परिवार के लिए है। जानिए आज आपकी राशि क्या कहती है, और अंत में पढ़िए कलकत्ता के बाज़ार में घड़ा, सुराही और तुम्बा बेचने वाले एक परिवार की कहानी, जिसने एक अंग्रेज़ को भारत की सबसे बड़ी कमज़ोरी दिखा दी।
मेष
सहयोग का दिन। परिवार के साथ बिताया समय सबको खुश रखेगा। भाई-बहनों की मदद से आर्थिक लाभ। जीवनसाथी की सकारात्मक सोच को समझें और सम्मान दें। आराम के लिए समय निकालें। स्वास्थ्य सामान्य।
वृषभ
सुखद रविवार। घर में मेहमानों का आगमन। खरीदारी में खर्च बढ़ेगा। संतान से खुशी। धार्मिक स्थल की यात्रा के योग। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
मिथुन
दोस्तों के साथ समय बीतेगा। कोई पुराना संपर्क फिर जुड़ेगा। रचनात्मक काम में मन लगेगा। आर्थिक मामलों में जल्दबाज़ी न करें। शाम को परिवार के साथ रहें।
कर्क
भावनात्मक सुकून। माता-पिता के साथ समय बिताएं। घर के कामों में सबका सहयोग। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। शाम को अच्छी खबर मिल सकती है।
सिंह
सूर्य का दिन आपके लिए विशेष। आत्मविश्वास और सम्मान बढ़ेगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में मुख्य भूमिका। धन लाभ। बच्चों के साथ अच्छा समय।
कन्या
आराम के दिन भी मन काम में लगा रहेगा। अगले सप्ताह की योजना बनाएं। किसी रिश्तेदार से मुलाकात। खान-पान में सावधानी। शाम सुखद।
तुला
रिश्तों में मधुरता। प्रेम संबंधों में निकटता। घूमने-फिरने का कार्यक्रम। आर्थिक स्थिति ठीक। सांस्कृतिक आयोजन में भागीदारी।
वृश्चिक
मन में कुछ उलझन। अकेले समय बिताकर चिंतन करें। परिवार से बहस से बचें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। पर्याप्त नींद लें।
धनु
उत्साहवर्धक दिन। यात्रा या तीर्थाटन की योजना। वरिष्ठ का मार्गदर्शन। छात्रों के लिए पढ़ाई का अच्छा दिन। परिवार में खुशी।
मकर
ज़िम्मेदारियों का दिन। बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य पर ध्यान। आर्थिक स्थिरता। शाम को आराम करें और सप्ताह की तैयारी करें।
कुंभ
नए लोगों से मुलाकात। रचनात्मक विचार लाभ देंगे। घर में शुभ कार्य की चर्चा। वाहन सावधानी से चलाएं। मित्रों से सहयोग।
मीन
रचनात्मक और शांत दिन। कला, संगीत या लेखन में मन लगेगा। परिवार के साथ समय बिताएं। आर्थिक मामलों में धैर्य रखें। दांपत्य जीवन सुखद। शाम को धार्मिक कार्य।
आज का प्रेरक प्रसंग: आपस की फूट, जगत की लूट
बात सन 1612 की है। जेठ की तपती दोपहर में कलकत्ता के एक व्यस्त बाज़ार में ईस्ट इंडिया कंपनी का एक अंग्रेज़ कर्मचारी घूम रहा था। एक दुकान पर भीड़ देखकर वह रुका। बूढ़ा दुकानदार मिट्टी के बर्तन बेच रहा था। “यह क्या है?” अंग्रेज़ ने पूछा। “घड़ा, साहब। इसमें पानी ठंडा रहता है।” अंग्रेज़ ने एक घड़ा खरीदा और आगे बढ़ा।
थोड़ी दूर एक और दुकान पर उसे लंबी गर्दन वाला बर्तन दिखा। दुकानदार बोला, “यह सुराही है, साहब — घड़े से भी ज़्यादा ठंडा पानी रखती है। आपने मेरे पिताजी से घड़ा खरीदा; वे ग्राहक को पहले ही रोक लेते हैं, यह नहीं बताते कि बेटे का बर्तन बेहतर है।” अंग्रेज़ ने सुराही भी खरीदी। तीसरी दुकान पर एक नौजवान टोंटी वाला छोटा बर्तन बेच रहा था। “यह तुम्बा है, साहब। आपने मेरे पिता से घड़ा और भाई से सुराही खरीदी, पर दोनों से पानी गिरता है। मेरे तुम्बे में टोंटी है, एक बूंद बर्बाद नहीं होती। लेकिन मेरे पिता और भाई मुझसे जलते हैं, ग्राहक को मेरी खूबी बताते ही नहीं।” अंग्रेज़ ने तुम्बा भी खरीदा — पर इस बार उसकी मुस्कान में एक कुटिल चमक थी।
अगली सुबह वह तीनों बर्तन लेकर अपने कैप्टन के पास पहुंचा और पूरी बात सुनाकर बोला, “सर, भारत सिर्फ धनवान नहीं है, यहां के लोग बेहद हुनरमंद हैं। लेकिन मैंने एक और चीज़ देखी — एक ही परिवार के तीन लोग एक-दूसरे की तारीफ नहीं कर सकते। इनमें अहंकार और ईर्ष्या इतनी है कि ये एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए बाहरी को अपना राज़ बता देते हैं। अगर हम इस फूट का इस्तेमाल करें, तो इस देश पर राज करना मुश्किल नहीं।” कहते हैं, यही सोच आगे चलकर “बांटो और राज करो” की नीति बनी।
शिक्षा: हुनर और संपन्नता किसी समाज को तब तक नहीं बचा सकते, जब तक उसमें आपसी एकता न हो। घर हो, संस्था हो या देश — जहां अपने ही अपनों की टांग खींचते हैं, वहां बाहरी का रास्ता आसान हो जाता है। आपस की फूट, जगत की लूट।
सदैव प्रसन्न रहिये – जो प्राप्त है, पर्याप्त है। जिसका मन मस्त है – उसके पास समस्त है।
अस्वीकरण: राशिफल सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और केवल पाठकों की रुचि के लिए है। प्रेरक प्रसंग लोककथा पर आधारित है। महत्वपूर्ण निर्णय अपने विवेक से लें।







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