उत्तराखंड

चारधाम यात्रा-2026 को लेकर मुख्यमंत्री ने कसी व्यवस्थाओं की कमान।

देवभूमि जे के न्यूज, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने…

चारधाम यात्रा-2026 को लेकर मुख्यमंत्री ने कसी व्यवस्थाओं की कमान।

देवभूमि जे के न्यूज, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यात्रा से जुड़े जनपदों के जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से यात्रा मार्गों, यातायात व्यवस्था, मौसम, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधों, भीड़ नियंत्रण, स्वच्छता तथा श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी महत्वपूर्ण यात्रा है। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवभूमि पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि चारधाम यात्रा-2026 के लिए अब तक 66,07,749 यात्रियों का पंजीकरण हो चुका है। वहीं 14 सितंबर 2026 की शाम 7 बजे तक 50,56,160 श्रद्धालु चारधाम एवं हेमकुंड साहिब के दर्शन कर चुके हैं। इनमें यमुनोत्री में 7,08,407, गंगोत्री में 7,89,773, श्री केदारनाथ में 14,98,544, श्री बदरीनाथ में 17,36,619 तथा श्री हेमकुंड साहिब में 3,22,817 श्रद्धालु शामिल हैं। यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर मौसम एवं भूस्खलन की स्थिति की निरंतर निगरानी करने को कहा। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा बल, बचाव दल एवं आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोला जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित आपदा को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहे और संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं।

यात्रा मार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री ने होल्डिंग एरिया में श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यातायात प्रबंधन इस प्रकार किया जाए कि यात्रियों को अनावश्यक जाम अथवा लंबे समय तक असुविधा का सामना न करना पड़े। स्थानीय स्तर पर यातायात पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार समन्वय बनाए रखें।

यमुनोत्री धाम में भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने धाम से लगभग 500 मीटर पहले दूसरा घोड़ा पड़ाव विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डंडी-कंडी सेवाओं को व्यवस्थित करने तथा खरसाली से वैकल्पिक मार्ग के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। पैदल मार्ग पर यात्रियों और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को अलग-अलग एवं व्यवस्थित रखने तथा सूर्यकुंड क्षेत्र में प्रभावी भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्यमंत्री ने घोड़े-खच्चरों के संचालन में निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराने को कहा। उन्होंने पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा में घोड़े-खच्चरों के उपयोग के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के साथ पशु कल्याण के मानकों का भी पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

केदारनाथ पैदल मार्ग के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने चीरबासा एवं भैरव ग्लेशियर क्षेत्र में यात्रियों, घोड़े-खच्चरों तथा डंडी-कंडी की आवाजाही को सुव्यवस्थित रखने को कहा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त निगरानी रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने यमुनोत्री पैदल मार्ग के चौड़ीकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने तथा गंगोत्री मार्ग पर चौड़ीकरण एवं गड्ढामुक्त करने के कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा स्यानाचट्टी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने को कहा।

ज्योतिर्मठ-मारवाड़ी मार्ग पर प्रभावी यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में उसे शीघ्र खोलने के लिए आवश्यक मशीनरी एवं संसाधन मौके पर उपलब्ध रहने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से यात्रा मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी समस्या की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने दिए विशेष निर्देश। उन्होंने चारों धामों में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए अलाव सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। विशेष रूप से श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ यात्रा मार्गों पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन एवं आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने घोड़े-खच्चरों की लीद के समुचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा यात्रा मार्गों पर गंदगी न फैलने देने को कहा। श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के साथ-साथ सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने मोबाइल नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में आपातकालीन संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संबंधित विभागों एवं दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। यात्रा मार्गों पर पर्याप्त संख्या में शौचालय, पेयजल, विद्युत, प्रकाश व्यवस्था एवं शटल सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही शौचालयों की नियमित सफाई और औचक निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया।

हेली सेवाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को हेली सेवाओं के टिकट निर्धारित दरों पर ही उपलब्ध कराए जाएं। निर्धारित दर से अधिक वसूली अथवा अनधिकृत टिकट बिक्री की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हेली सेवाओं का संचालन करने और इसमें श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि यात्रा के दौरान संवेदनशील स्थलों और मार्गों की निरंतर निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और किसी भी समस्या के सामने आने पर उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी यात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जाए और जहां भी सुधार की आवश्यकता हो, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यात्रा के दौरान आने वाली चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाकर व्यवस्थाएं तैयार की जाएं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, गृह सचिव शैलेश बगौली सहित शासन, प्रशासन एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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