उत्तराखंड

शौर्य दिवस पर परमार्थ निकेतन पहुंचे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवान।

देव भूमि जे के न्यूज,ऋषिकेश, 27 अक्टूबर। भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर देश की सुरक्षा में समर्पित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सैकड़ों…

देव भूमि जे के न्यूज,ऋषिकेश, 27 अक्टूबर।

भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर देश की सुरक्षा में समर्पित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सैकड़ों जवानों और चार संकाय सदस्यों का दल परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश पहुंचा। यहां दल के सदस्यों ने गंगा आरती, सत्संग, योग, ध्यान और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता कर आध्यात्मिक शांति एवं भारतीय संस्कृति का अनुभव किया।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत संचालित मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में सीसीवायडब्ल्यूआई पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे इस दल में देश के छह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कार्मिक शामिल हैं। इस दो दिवसीय शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य प्रतिभागियों को योग की समृद्ध परंपरा, शिक्षण पद्धतियों और संस्थागत गतिविधियों से परिचित कराना है।

परमार्थ निकेतन में आयोजित आध्यात्मिक गतिविधियों के दौरान जवानों ने योग और ध्यान के महत्व को समझा। योग को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन, एकाग्रता और आत्मानुशासन विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसके दैनिक जीवन में उपयोग पर जोर दिया गया। राष्ट्रसेवा में समर्पित कार्मिकों के लिए योग और ध्यान मानसिक दृढ़ता तथा संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने शौर्य दिवस के अवसर पर भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के कारण देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमारे जवान केवल वेतन के लिए नहीं, बल्कि वतन के लिए जीते हैं। उनका जीवन मातृभूमि की रक्षा, राष्ट्र के सम्मान और देशवासियों की सुरक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण है। राष्ट्र की रक्षा उनके लिए केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च निष्ठा और साधना है।

उन्होंने कहा कि सैनिकों का शौर्य, अनुशासन और बलिदान प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। राष्ट्र का सम्मान और उसकी सुरक्षा हम सभी का सामूहिक दायित्व है। वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रत्येक नागरिक को सशक्त, सुरक्षित और समरस भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने भी वीर जवानों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा को नमन किया। उन्होंने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के विश्वास, साहस और स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि देश के वीर जवान अपने परिवारों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में मातृभूमि की रक्षा के लिए निरंतर तत्पर रहते हैं। उनका त्याग और समर्पण पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। सैनिकों का सम्मान करना राष्ट्र का सम्मान करना है और उनके प्रति कृतज्ञता जीवनभर निभाया जाने वाला राष्ट्रीय धर्म है।

इस दल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB) तथा असम राइफल्स के जवान शामिल रहे। पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. विनय भारती हैं, जबकि शिक्षकों में वायु सहरावत, कर्मवीर आर्य और वसुधा शामिल हैं। परमार्थ निकेतन की ओर से योगाचार्य गंगा नन्दिनी ने इस दो दिवसीय यात्रा का नेतृत्व किया।

भारतीय पैदल सेना दिवस एवं शौर्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस यात्रा ने राष्ट्रसेवा, अनुशासन, आध्यात्मिकता और योग के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संदेश रहा कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान, सहयोग और कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 1
Discussion

0 Comments

Join the conversation

Share your view on this story. Your email address will not be published.