धर्म-कर्म

श्रृंगवेरपुर धाम पहुंचे स्वामी चिदानन्द सरस्वती, श्रीराम-निषादराज की मैत्री के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प।

देव भूमि जे के न्यूज,श्रृंगवेरपुर धाम, 26 अक्टूबर।** भगवान श्रीराम और निषादराज की अद्वितीय मैत्री, सामाजिक समरसता, आत्मीयता और निष्काम भक्ति की पावन भूमि श्रृंगवेरपुर धाम में सोमवार…

देव भूमि जे के न्यूज,श्रृंगवेरपुर धाम, 26 अक्टूबर।**

भगवान श्रीराम और निषादराज की अद्वितीय मैत्री, सामाजिक समरसता, आत्मीयता और निष्काम भक्ति की पावन भूमि श्रृंगवेरपुर धाम में सोमवार को परमार्थ निकेतन के पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती का आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने धाम का अवलोकन किया और श्रृंगी ऋषि तथा माता शांता देवी से जुड़े मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश-दुनिया में सुख, शांति, सद्भाव और जनकल्याण की कामना की। उन्होंने श्रृंगवेरपुर धाम के पुनर्निर्माण एवं सांस्कृतिक वैभव की पुनर्स्थापना के संकल्प को भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

श्रृंगवेरपुर धाम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद में मां गंगा के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक तीर्थस्थल है। रामायण परंपरा में इस स्थान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के यहां पहुंचने पर निषादराज ने उनका आत्मीय स्वागत किया था। श्रीराम और निषादराज की मित्रता भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास, सेवा, समर्पण और सामाजिक समानता का प्रेरणादायी उदाहरण मानी जाती है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रृंगवेरपुर धाम के पुनरुत्थान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे पवित्र स्थल केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक स्मृतियों और जीवन-मूल्यों के संवाहक हैं। इनका संरक्षण और विकास आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ ही समाज में प्रेम, सद्भाव और समरसता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

परमार्थ निकेतन द्वारा श्रृंगवेरपुर धाम के पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य इस प्राचीन तीर्थ की आध्यात्मिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक गरिमा को नई पहचान दिलाना है। इस पहल के माध्यम से श्रीराम और निषादराज की मित्रता में निहित समानता, आत्मीयता, निष्काम सेवा और मानवीय संवेदना के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की परिकल्पना की गई है।

प्रयागराज में परमार्थ त्रिवेणी पुष्प के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपराओं को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की तरह श्रृंगवेरपुर धाम का विकास भी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल भौतिक सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि तीर्थ से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना भी है।

श्रृंगवेरपुर की पहचान भगवान श्रीराम और निषादराज की मैत्री के साथ-साथ श्रृंगी ऋषि और माता शांता देवी से जुड़ी परंपराओं के कारण भी विशेष है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता शांता राजा दशरथ की पुत्री और श्रृंगी ऋषि की पत्नी थीं। श्रृंगी ऋषि का संबंध राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ से भी बताया जाता है, जो रामायण की प्रमुख कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

धाम में स्थित निषादराज पार्क भी इस ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को रेखांकित करता है। यहां भगवान श्रीराम और निषादराज की विशाल प्रतिमा उनके आत्मीय संबंधों और सामाजिक समरसता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करती है। यह स्थल श्रद्धालुओं को याद दिलाता है कि मानवीय संबंधों की वास्तविक शक्ति पद, प्रतिष्ठा और सामाजिक भेदभाव में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और हृदय की पवित्रता में निहित है।

अपने प्रवास के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मां गंगा के पावन तट पर गंगा आरती की और विश्वकल्याण, जनकल्याण तथा मानवता के मंगल की प्रार्थना की। उन्होंने श्रृंगवेरपुर धाम को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संकल्पना को आगे बढ़ाने पर बल दिया।

श्रृंगवेरपुर धाम का पुनरुत्थान भारतीय संस्कृति की उस उदात्त भावना को सशक्त करने का माध्यम बन सकता है, जिसमें आस्था के साथ सेवा, आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक सद्भाव और विरासत के साथ विकास का समन्वय दिखाई देता है। भगवान श्रीराम और निषादराज की मैत्री का संदेश आज भी प्रासंगिक है। यह समाज को प्रेरित करता है कि प्रेम, समानता, विश्वास और मानवीय गरिमा के आधार पर ही एक समरस एवं संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।

परमार्थ निकेतन की इस पहल के माध्यम से श्रृंगवेरपुर धाम की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने तथा श्रीराम-निषादराज की मैत्री के शाश्वत संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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