देवभूमि जेके न्यूज, रायवाला/प्रतीतनगर, 26 अक्टूबर।
श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत प्रतीतनगर एवं रायवाला क्षेत्र में रविवार को भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। दोपहर में निकली श्रीराम बारात में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वहीं, रात्रि में रामलीला के मुख्य मंच पर श्रीराम वनवास की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा से लेकर माता कैकेयी द्वारा दो वरदान मांगने और प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास दिए जाने तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच के उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने बताया कि दोपहर में निकली शोभायात्रा में क्षेत्रवासियों और रामभक्तों ने उत्साह के साथ भाग लिया। रात्रि में आयोजित लीला में कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से रामायण के मार्मिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान दर्शक पूरी तन्मयता से लीला देखते रहे और कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
**मंथरा के बहकावे में आईं कैकेयी, भरत के लिए मांगा राजसिंहासन**
रामलीला में दिखाया गया कि अयोध्या नगरी में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की जाती है। अगले दिन श्रीराम का राजतिलक होने की सूचना से पूरी अयोध्या में प्रसन्नता का माहौल छा जाता है। इसी बीच मंथरा को जब इस बात का पता चलता है, तो वह माता कैकेयी के पास पहुंचकर उन्हें इसकी जानकारी देती है।
लीला के अनुसार, देवताओं के अनुरोध पर देवी सरस्वती मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं, जिसके बाद वह कैकेयी को भरत के भविष्य और राजसिंहासन को लेकर भड़काने लगती है। मंथरा कैकेयी को समझाती है कि यदि श्रीराम राजा बन गए, तो महारानी कौशल्या का प्रभाव बढ़ जाएगा और भरत को राजसत्ता प्राप्त नहीं हो सकेगी। उसके बहकावे में आकर कैकेयी भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक को रोकने और भरत को राजा बनवाने का निश्चय कर लेती हैं।
**राजा दशरथ से मांगे दो वरदान, श्रीराम को मिला वनवास**
मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए उन वरदानों की याद दिलाती है, जिन्हें उन्होंने देवासुर संग्राम के दौरान कैकेयी के साहस और सूझबूझ से प्रभावित होकर देने का वचन दिया था। कथा के अनुसार, युद्ध के दौरान राजा दशरथ के रथ की कील निकल जाने से स्थिति संकटपूर्ण हो गई थी। उस समय कैकेयी ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए रथ को संभाला और राजा दशरथ के प्राणों की रक्षा की थी। कैकेयी के इस कार्य से प्रसन्न होकर राजा दशरथ ने उन्हें वरदान मांगने का वचन दिया था, लेकिन उस समय उन्होंने वरदान मांगने के बजाय उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित रख लिया था।
मंथरा की बातों में आकर कैकेयी कोपभवन में चली जाती हैं और राजा दशरथ के सामने अपने दो वरदान मांगती हैं। पहले वरदान में वह भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन मांगती हैं, जबकि दूसरे वरदान में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग करती हैं।
कैकेयी की यह मांग सुनकर राजा दशरथ स्तब्ध रह जाते हैं। पुत्र श्रीराम के प्रति अपने असीम प्रेम और दिए गए वचन के बीच फंसे राजा दशरथ की विवशता का कलाकारों ने मार्मिक चित्रण किया। इस दृश्य ने रामभक्तों को भावुक कर दिया। पूरे मंचन के दौरान दर्शक रामायण के प्रसंगों से जुड़े रहे और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
**कलाकारों ने अपने अभिनय से मंच पर जीवंत किए रामायण के पात्र**
श्रीराम वनवास लीला में भगवान श्रीराम की भूमिका सौरभ चमोली, लक्ष्मण की भूमिका चन्द्रमणी शर्मा, माता सीता की भूमिका प्रिन्स, राजा दशरथ की भूमिका प्रदीप अरोड़ा, कैकेयी की भूमिका राहुल, कौशल्या की भूमिका नरेन्द्र रावत, सुमित्रा की भूमिका समर, गुरु वशिष्ठ की भूमिका भगत सिंह, मंथरा की भूमिका आयुष जोशी, सुमंत की भूमिका सूरज चमोली, द्वारपाल की भूमिका तीरथ सिंह तथा मां सरस्वती की भूमिका खुशी ने निभाई।
सभी कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से लीला के प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विशेष रूप से कैकेयी के वरदान मांगने और राजा दशरथ के शोक से जुड़े दृश्यों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
**प्रधानाचार्य कलावती जोशी को किया सम्मानित**
श्रीराम वनवास लीला का मंचन देखने पहुंचीं प्रधानाचार्य कलावती जोशी को लोक कल्याण समिति की ओर से राम दरबार की माला और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित अतिथियों और सैकड़ों रामभक्तों ने रामलीला का आनंद लिया तथा कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम में लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव नरेश थपलियाल, प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) और महिला कल्याण सचिव अंजू बडोला सहित नवीन चमोली, आशीष सेमवाल, राजेन्द्र प्रसाद कुकरेती, राजेन्द्र प्रसाद तिवाड़ी, अनीता जुगलान, रेखा थपलियाल, विनीता सेमवाल, रोहित, राज, आयुष, रज्जो, सृष्टि पंवार, त्रिलोक सिंह, आदित्य, जगदीश सिंह, नितेश चमोली, नितीश सेमवाल और आशीष उनियाल सहित बड़ी संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे।
लोक कल्याण समिति ने रामलीला महोत्सव में सहभागिता करने वाले अतिथियों, कलाकारों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक मर्यादाओं, त्याग, कर्तव्य और वचनपालन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।







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