हरिद्वार, 14 अगस्त 2026 (देवभूमि जेके न्यूज)।
धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला, गंगाबाग परिसर (सत्यम विहार कॉलोनी के समीप) में भव्य श्री बद्रीनाथ श्री केदारनाथ मंदिर का स्थापना दिवस समारोह आज शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को पूरी धार्मिक भव्यता, राजशाही परंपरा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मुख्य अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद मंदिर के कपाट आम जनता और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत रूप से खोल दिए गए हैं।
पंडित कृष्णानंद उनियाल के आचार्यत्व में गूंजे वैदिक मंत्र
स्थापना दिवस समारोह के तहत आज सुबह से ही मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आरंभ हो गए थे। यह पूरा कार्यक्रम पंडित कृष्णानंद उनियाल की देखरेख में विद्वान ब्राह्मणों के दल द्वारा संपन्न कराया गया। प्रातः 11:00 बजे से शुरू हुए मुख्य पूजा कार्यक्रम में ब्राह्मणों ने सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार, नवग्रह पूजन, और भगवान बद्री विशाल व बाबा केदारनाथ के विग्रहों का अभिषेक कर विश्व कल्याण की कामना की। मंत्रों की पावन ध्वनि से पूरा गंगाबाग क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
टिहरी शाही परिवार ने मुख्य यजमान के रूप में निभाई परंपरा
उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संवाहक रहे टिहरी गढ़वाल राजवंश के सदस्यों ने इस समारोह में मुख्य प्रेषक और यजमान के रूप में शिरकत की। महाराजा मनुजेंद्र शाह, टीका देई साहिबा क्षीरजा कुमारी शाह ने पूजा-अर्चना में सम्मिलित होकर भगवान के चरणों में मत्था टेका। शाही परिवार की इस गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया। समारोह में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
आम जनता के लिए खुले कपाट, उमड़ी भीड़-
पूजा-अर्चना और महाआरती का क्रम पूरा होते ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही कतारों में खड़े स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री-केदार के जयकारों के साथ दर्शन किए।
भव्य भंडारे में सैकड़ो लोगों ने ग्रहण किया महाप्रसाद-
दोपहर 12:30 बजे भगवान को भोग लगाने के बाद मंदिर परिसर में एक दिव्य और भव्य भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया। सत्यम विहार कॉलोनी, भूपतवाला और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने इस भंडारे में बेहद श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। देर शाम तक चले इस भंडारे के साथ ही स्थापना दिवस का यह पावन आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
आपको बता दें कि भूपतवाला स्थित इस राजमंदिर और कोठी की बनावट में पारंपरिक उत्तराखंडी और राजशाही वास्तुकला की झलक मिलती है। इसकी भव्यता और नक्काशीदार द्वार पुराने समय की वास्तुकला के गवाह हैं। मंदिर के भीतर भगवान बद्रीनाथ (विष्णु स्वरूप) और भगवान केदारनाथ (शिव स्वरूप) की अत्यंत सुंदर मूर्तियाँ/प्रतिरूप स्थापित हैं। यहाँ की पूजा पद्धतियाँ आज भी उसी शुद्धता और राजशाही नियमों से संचालित होती हैं, जैसी मूल धामों में की जाती हैं। यह परिसर हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र (मुख्य ऋषिकेश-हरिद्वार मार्ग) में शांतिकुंज और सप्तऋषि आश्रम के समीप स्थित है। यह क्षेत्र गंगा तट के निकट होने के कारण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक वातावरण से परिपूर्ण है।
आज के इस दिव्य आयोजन में पंडित कृष्णानंद उनियाल, कमलेश चमोली,राजपाल जड़धारी, अविनाश पाल ,नितेश चौहान, राहुल, राजीव मेहता, जाह्नवी मेहता, मंनजय मेहता, केवल्य मेहता, देवेंद्र नाथ तिवारी सहित तमाम लोगों ने प्रतिभाग किया।





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