उत्तराखंड

उत्तराखंड में 50 पुरानी 108 एम्बुलेंस जल्द बदली जाएंगी, मुख्य सचिव ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश.

देवभूमि जे के न्यूज,देहरादून, 22 अक्टूबर।** उत्तराखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा में सुधार की दिशा…

उत्तराखंड में 50 पुरानी 108 एम्बुलेंस जल्द बदली जाएंगी, मुख्य सचिव ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश.


देवभूमि जे के न्यूज,देहरादून, 22 अक्टूबर।** उत्तराखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी लगभग 50 पुरानी 108 एम्बुलेंस को तत्काल बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। साथ ही एम्बुलेंस सेवा की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर विशेष तंत्र विकसित करने और मरीजों तक समय पर सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी है। आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता और उसमें मौजूद जीवनरक्षक उपकरणों की कार्यशीलता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी और बार-बार खराब होने वाली एम्बुलेंस को प्राथमिकता के आधार पर बदलने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

बैठक में एम्बुलेंस सेवा की नियमित निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत एक समर्पित टीम गठित करने के निर्देश भी दिए गए। यह टीम सेवा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा और विश्लेषण करेगी। इसके साथ ही अलग-अलग स्तरों पर साप्ताहिक और मासिक निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि सेवा में आने वाली कमियों, वाहनों की खराबी और संचालन संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।

मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस के रिस्पांस टाइम की समीक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज तक एम्बुलेंस पहुंचने के समय का आकलन केवल औसत रिस्पांस टाइम के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मामले में वास्तविक समय का विश्लेषण किया जाए। इससे उन मामलों की पहचान हो सकेगी, जिनमें एम्बुलेंस पहुंचने में अधिक समय लगा। इसके बाद देरी के कारणों का पता लगाकर आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।

एम्बुलेंस में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की गुणवत्ता और कार्यशीलता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक माह अनिवार्य जांच कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया, ताकि उपकरणों की जांच नियमित रूप से हो और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की बाधा न आए।

सेवा को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा से संबंधित मोबाइल ऐप भी शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके माध्यम से मरीज की स्थिति और उसके स्थान की जानकारी के आधार पर एम्बुलेंस की आवाजाही तथा सेवा की निगरानी को अधिक सुगम बनाने की योजना है। मुख्य सचिव ने सरकारी एम्बुलेंस को भी आवश्यक सुविधाओं से लैस कर इस व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया। इससे प्रदेश में उपलब्ध एम्बुलेंस संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में 108 सेवा के अंतर्गत 272 एम्बुलेंस संचालित हैं। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा 250 से अधिक सरकारी एम्बुलेंस भी संचालित की जा रही हैं। इन संसाधनों की प्रभावी निगरानी, बेहतर समन्वय और समयबद्ध रखरखाव से प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय, रोहित मीणा तथा महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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