उत्तराखंड

श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस का भव्य आयोजन, दो दर्जन से अधिक शिक्षक और साहित्यकार सम्मानित।

देवभूमि जे के न्यूज ऋषिकेश। श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज की प्रार्थना सभा में सोमवार को हिंदी दिवस हर्षोल्लास और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। हिंदी भाषा के…

श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस का भव्य आयोजन, दो दर्जन से अधिक शिक्षक और साहित्यकार सम्मानित।

देवभूमि जे के न्यूज ऋषिकेश। श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज की प्रार्थना सभा में सोमवार को हिंदी दिवस हर्षोल्लास और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। हिंदी भाषा के महत्व, उसके गौरव और साहित्यिक विरासत को समर्पित इस आयोजन में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी के प्रति अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों को सम्मानित भी किया गया।

समारोह में शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘आवाज़’ के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् अशोक क्रेजी शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से हिंदी साहित्य का अध्ययन करने, पुस्तकों को अपना मित्र बनाने तथा लेखन एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

उन्होंने हिंदी के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। कहा कि बदलते तकनीकी दौर में हिंदी के सामने नई संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करते हुए इसे ज्ञान, साहित्य, तकनीक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रभावी भाषा बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

‘आवाज़ साहित्यिक गौरव सम्मान’ से सम्मानित हुए शिक्षक

हिंदी दिवस के अवसर पर ‘आवाज़’ साहित्यिक संस्था की ओर से हिंदी अध्यापन और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विद्यालय के हिंदी शिक्षक सुखदेव कंडवाल और रेखा बिष्ट को ‘आवाज़ साहित्यिक गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों ने इस पहल के लिए संस्था का आभार व्यक्त करते हुए हिंदी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी, शिवप्रसाद बहुगुणा, डा. सुनील दत्त थपलियाल, जितेंद्र बिष्ट और जयकृत रावत ने मुख्य अतिथि अशोक क्रेजी शर्मा का स्वागत किया। उन्हें अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद विद्यालय परिवार की ओर से हिंदी शिक्षकों का माला पहनाकर, उत्तरीय ओढ़ाकर और पेन भेंट कर अभिनंदन किया गया।

सम्मान समारोह के दौरान हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति योगदान एवं रुचि रखने वाले शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सुशीला बड़थ्वाल, रेखा बिष्ट, नीलम जोशी, सुखदेव कंडवाल, रंजना, जगदम्बा प्रसाद थपलियाल, रीता पुंडीर और रंजन अंथवाल सहित अन्य लोग शामिल रहे।

हिंदी दिवस समारोह में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हिंदी भाषा की महत्ता, भारतीय संस्कृति और साहित्यिक भावनाओं पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में हिंदी कविता, भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने हिंदी के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को प्रदर्शित किया।

प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति निरंतर जुड़ाव का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करने तथा साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। सफल प्रस्तुतियां देने वाले छात्र-छात्राओं को विद्यालय की ओर से सम्मानित भी किया गया।

समारोह के दौरान विद्यालय का वातावरण हिंदीमय नजर आया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को हिंदी के समृद्ध इतिहास, साहित्य और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं और शिक्षणेतर कर्मचारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सभी ने हिंदी भाषा के सम्मान, प्रचार-प्रसार और उसके निरंतर विकास में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित हिंदी दिवस समारोह ने विद्यार्थियों में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने के साथ ही शिक्षकों एवं साहित्यकारों के योगदान को सम्मान देने का संदेश दिया। समारोह का उद्देश्य हिंदी को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के जीवन, विचार और रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनाना रहा।

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