उत्तराखंड

*ऋषिकेश : त्रिदंडी श्रीमननारायण रामानुज जीयर स्वामी पधारे ऋषिकेश- श्री हृषिकेश भरत भगवान का किया दर्शन।*

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश : त्रिदंडी श्रीमन नारायण रामानुज स्वामी जियर स्वामी जिन्हें चिन्न जीयर स्वामी के नाम से भी जाना जाता है । स्वामी महाराज…

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश : त्रिदंडी श्रीमन नारायण रामानुज स्वामी जियर स्वामी जिन्हें चिन्न जीयर स्वामी के नाम से भी जाना जाता है । स्वामी महाराज श्री मंगलवार को श्री बद्रीनाथ धाम से दर्शन करने के बाद हृषिकेश पहुंचे थे ।यहां पर उन्होंने श्री भरत मंदिर में हृषिकेश नारायण भरत भगवान के दर्शन किए ।उसके बाद सीधे हैदराबाद के लिए निकल गए।
इस दौरान तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि भारत मंदिर के वर्तमान महंत वत्सल प्रपंचाचार्य महाराज द्वारा उत्तरी व पुष्पहार और भारत भगवान का स्मृति चिन्ह बैठकर उनका स्वागत अभिनंदन किया और आशीर्वाद ग्रहण किया उनको पौराणिक पांचवी सदी के शिलालेख भी दिखाएं और साथ ही जानकारी दी वहां पर जो भी म्यूजियम मैं प्राचीन मूर्तियां शिलालेख रखी गई है पुरानी जो मूर्तियां निकली हुई है और उसके श्री भारत मंदिर के पौराणिक महत्व को भी पूरा अवलोकन करवाया इस दौरान स्वामी जी ने दर्शन करने के बाद काफी खुश दिखे और उन्होंने कहा कि मैं काफी सुना था श्री भारत मंदिर के बारे में आज यहां दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ और मुझे खुशी हो रही है कि धरोहर को आप लोगों ने बचा के रखा हुआ है यह शुभ संकेत है
इस दौरान उनके साथ महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज भारत मंदिर समिति सोसाइटी के प्रबंधक हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य भास्कर सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
इस दौरान स्वामी जी ने उनको हैदराबाद आने के लिए भी आमंत्रित किया साथ ही कहा युवा संत समाज अगर पौराणिक स्मृतियों को और उसके महत्व को समझ रहे हैं और उनका संरक्षण कर रहे हैं और आगे आ रहे हैं और धरोहर को सहेज कर रख रहे हैं तो यह हमारे लिए एक शुभ संकेत है। इस दौरान उन्होंने ऋषि कुमारन से भी वार्ता की और उनसे पूछा वेदों के बारे में और जो अन्य धार्मिक ग्रंथ है उनके बारे में मैं भी उन चर्चा की। एक घंटा लगभग अपना समय यहां पर देने के बाद वह वापस हैदराबाद के लिए एयरपोर्ट के लिए निकल गए।

स्वामी जी के बारे में-

वर्तमान समय में हुए श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रचारक और दक्षिण भारतीय संत सन्यासी हैं उन्होंने भारत नेपाल से लेकर विदेश तक वैष्णो धाम का प्रचार किया और वैदिक संस्कृत गुरुकुलों का संचालन भी किया है। वह रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित विशिष्टाद्वैत दर्शन का अनुसरण करते हैं। वह भगवान विष्णु के आराधक हैं स्वामी जी के अनेकों भाषाओं के प्रखर वक्ता एवं संस्कृत भाषा के विद्वान हैं।

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