उत्तराखंड

*ऋषिकेश- लेखिका ऋतु ऋषिकेश असूजा का साहित्य सृजन का सफरनामा*

देवभूमि जेके न्यूज 12 जून 2024 -लेखन मानव भाषा का एक स्थायी प्रतिनिधित्व बनाने का कार्य है।वास्तव में लेखन के केवल चार मुख्य प्रकार हैं- व्याख्यात्मक, वर्णनात्मक, प्रेरक…

देवभूमि जेके न्यूज 12 जून 2024 -लेखन मानव भाषा का एक स्थायी प्रतिनिधित्व बनाने का कार्य है।वास्तव में लेखन के केवल चार मुख्य प्रकार हैं- व्याख्यात्मक, वर्णनात्मक, प्रेरक और कथात्मक । इन चार लेखन शैलियों में से प्रत्येक का एक अलग उद्देश्य है, और उन सभी को विभिन्न प्रकार के लेखन कौशल की आवश्यकता होती है।लेखन का महत्व बहुत अधिक है। यह हमें आत्मविश्वास, स्वतंत्रता, और सोचने की क्षमता प्रदान करता है। इसके माध्यम से हम अपने विचारों को साझा करके समाज में बदलाव ला सकते हैं। यह हमें सोचने की क्षमता में सुधार करता है और हमारे मस्तिष्क को विकसित करता है। इसी कड़ी में ऋषिकेश की लेखिका जो कि विगत कई वर्षों से विभिन्न विषयों पर अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में बदलाव, प्राकृतिक सानिध्य, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक पुस्तकों का सृजन कर एक नया आयाम स्थापित किया है। जी हां ऋषिकेश की लेखिका ऋतु ऋषिकेश असूजा जिन्होंने अपने लेखनी के माध्यम से विभिन्न विषयों पर पुस्तकें लिखकर एक मुकाम हासिल किया है। आज बढ़ते इंटरनेट युग में उनके हजारों प्रशंसक उनके द्वारा लिखी हुई किताबों को पढ़कर खुश होते हैं और दिनोंदिन उनके पाठकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

एक भेंटवार्ता के दौरान ऋतु ऋषिकेश असूजा ने बताया कि अब तक हमने जो किताबें लिखी हुई है अथवा जो संयुक्त रूप से प्रकाशित हुई है उसमें मुख्य रूप से काव्य प्रवाह, मेरा भारत महान, गुंजन, इतिवृत्ति ,वीरांगनाओं की शौर्यगाथा, कालजयी, ऊंचाइयां ,अनुभूति, नारी तू अपराजिता, सीढ़ियां। अभी उनकी नई-नई एक पुस्तक प्रकाशित हुई है जो की चर्चा में है “ऋषिकेश की विरासत”- ऋषिकेश की विरासत के विषय में उन्होंने बताया कि ऋषिकेश अपने आप में विश्व में एक अमूल्य धरोहर है !गंगा नदी सुंदर ,पहाड़ ,सुंदर घाटिया, मनमोहक नजारे, मंदिरों में बजते घंटी घड़ियाल पूरे विश्व को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। इसी विषय को लेकर मैंने ऋषिकेश की विरासत लिखी है। यदि मेरी लेखनी से समाज में कुछ सुधार होता है, बदलाव होता है तो मेरे लिए गर्व की बात है।
मैं मसूरी में अपनी पढ़ाई करते हुए 11वीं में एक प्रतिष्ठित दैनिक दैनिक अखबार में लेख लिखा था और मुझे उसका पारिश्रमिक ₹500 मिला, मै इससे बेहद उत्साहित हुई और तब से यह लेखन का कार्य लगातार चल रहा है, और भविष्य में भी मैं इसे जारी रखूंगी ऊंचाइयां नाम से गूगल अथवा क्रोम पर मेरा ब्लॉग है। आप उसमें मेरी लिखी हुई कहानियों कविताओं को पढ़ सकते हैं और अपनी राय दे सकते हैं।

(ऋतु ऋषिकेश असूजा से साहित्यिक चर्चा की विडियो आप यूट्यूब पर क्लिक कर देख सकते हैं)

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