उत्तराखंड

“नेत्रदान महादान हरिद्वार- ऋषिकेश के भीष्म पितामह जाते-जाते दो व्यक्तियों को दे गए रोशनी “

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश,16/04/2024- अंधेरे जीवन में रोशनी की किरण लाने वाले राम शरण चावला गत दिवस दुनिया से विदा हो गए। नेत्रदान, रक्तदान व देहदान…

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश,16/04/2024-
अंधेरे जीवन में रोशनी की किरण लाने वाले राम शरण चावला गत दिवस दुनिया से विदा हो गए। नेत्रदान, रक्तदान व देहदान को समर्पित चावला गत दो माह से अस्वस्थ चल रहे थे ,जिन्होंने अपने हरिद्वार निवास पर आखिरी सांस ली।
1986 से नेत्रदान अभियान में समय की आहुति देने वाले 67 वर्षीय राम शरण चावला जाते-जाते दो व्यक्तियों की अंधेरी जिंदगी में रोशनी भर गए ।श्री चावला के दिशा निर्देशन में ऋषिकेश , हरिद्वार के साथ-साथ आसपास के 325 व्यक्तियों के नेत्रदान करा कर 650 व्यक्तियों को की अंधेरी जिंदगी में रोशनी दी ।जाते-जाते दो व्यक्तियों की जिंदगी में रोशनी भरने से 652 को यह लाभ मिल चुका है। 1000 व्यक्तियों को प्रकाश देने का लक्ष्य अब उनके सहयोगी गोपाल नारंग पुरा करेंगे ।
श्री चावला के अनुसार अंधेरी दुनिया क्या होती है आप 2 मिनट आंखें बंद करके महसूस कर सकते हैं ।अंधेरी जिंदगी में रोशनी भरना उनके जीवन का मकसद था ।38 वर्षों की तपस्या से ही 652 व्यक्तियों ने यह रंग-बिरंगा संसार देखा।
रामचरण चावला ने वेणु आई बेंक से नेत्र दान महादान का आंदोलन शुरू किया।तीसरा शतक 6 माह पूर्व ऋषिकेश निवासी रतन सिंह भंडारी के नेत्रदान से पूर्ण हुआ, जिससे 600 चिराग जले ।कहते हैं किसी भी काम को सच्ची लगन से किया जाए तो परिणाम अवश्य आते हैं ।
प्रारंभ में रामशरण को नेत्रदान फॉर्म भरने में ही लोग हिचकते थे। ऋषिकेश में गोपाल नारंग के पिता स्वर्गीय श्री गोविंद लाल नारंग के नेत्रदान के बाद अभियान ने गति पकड़ ली। नेत्रदान अभियान का तीसरा शतक लगा चुकी रामगोपाल के नाम से जाने वाली जोड़ी ने पांच शतक का लक्ष्य निर्धारित किया है अब तक 326 नेत्रदान के साथ-साथ दो देहदान भी कराए जा चुके हैं, एवं 12 व्यक्तियों ने देहदान का संकल्प भी लिया है। दोनों चाहते थे कि जल्द से जल्द रोशनी देने का अभियान और गति पकड़ जाए। रामशरण कहते रहे कि लोगों को नेत्र दान अभियान से जुड़ना चाहिए। जब शरीर ही नहीं रहा तो नेत्र तो दूसरों के काम आ सकते हैं।
रामशरण को अफसोस रहा कि नेत्र दान का संकल्प पत्र भरने के बावजूद मृत्यु उपरांत परिवार मृतक के नेत्रदान में संकोच करते थे ,लेकिन अब बहुत से परिजन काफी सहयोग कर रहे हैं ।नेत्रदान कार्यकर्ता गोपाल नारंग ने समाज से अपील की है कि दूसरों के अंधेरे जीवन में उजाला लाने के लिए नेत्रदान अभियान से अवश्य जुड़े । यही रामशरण चावला को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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