उत्तराखंड

*ऋषिकेश में आत्मज्ञान का उत्सव: आचार्य प्रशांत के शिविर में देश-विदेश से उमड़ा जनसैलाब*

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) - तीन वर्षों के अंतराल के पश्चात ऋषिकेश में आयोजित आचार्य प्रशांत का दो-दिवसीय शिविर 25 और 26 अप्रैल को अभूतपूर्व उत्साह…

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –

तीन वर्षों के अंतराल के पश्चात ऋषिकेश में आयोजित आचार्य प्रशांत का दो-दिवसीय शिविर 25 और 26 अप्रैल को अभूतपूर्व उत्साह और सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रानंद आश्रम पहुँचे, जबकि ऑनलाइन माध्यम से लाखों लोग इन सत्रों से जुड़े रहे। शिविर की समाप्ति के अगले दिन, 27 अप्रैल को, आचार्य प्रशांत AIIMS ऋषिकेश के छात्रों को संबोधित करेंगे।

आपको बता दें कि आचार्य प्रशांत, जो आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र, राष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तकों के लेखक और प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं, पिछले कुछ वर्षों में देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में दर्शन और आत्मबोध पर व्याख्यान देते रहे हैं। AIIMS ऋषिकेश में उनका संबोधन इस क्रम की एक और महत्त्वपूर्ण कड़ी होगी।

शिविर के दौरान आचार्य प्रशांत ने कठोपनिषद और ऋभु गीता के श्लोकों के माध्यम से आत्मज्ञान, आंतरिक स्वतंत्रता और मानवीय संबंधों की प्रकृति पर गहन विवेचन किया। उन्होंने कहा: “अपने आप से मीठे झूठ बोलना पूरी दुनिया के लिए घातक है।” उन्होंने यह भी कहा कि “जब लोगों के जीवन में प्रेम होता है, तो वे दुनिया में हिंसक नहीं होते” और जलवायु संकट को मानवीय मनोदशा से जोड़ते हुए कहा कि “जितनी अधिक तीव्रता का तनाव लोगों के भीतर होता है, उतनी ही पृथ्वी जलती है।” उन्होंने आधुनिक जीवन की एक बहुप्रचलित धारणा पर भी प्रश्नचिह्न लगाया: “पर्सनल और प्रोफेशनल के बीच संतुलन का विचार भी एक झूठ है, जो हमने अपने आप से कह रखा है, मानो वह व्यक्ति, जो ये दोनों जीवन जी रहा है, अलग-अलग हो।”

प्रतिदिन प्रातः 4.30 बजे आयोजित सत्रों के लिए भी बड़ी संख्या में प्रतिभागी समय से पूर्व ही पहुँच गए। गंगा तट पर आयोजित विशेष गतिविधियों में प्रतिभागियों ने कबीर साहब के भजनों का सामूहिक गायन किया और अपने जीवन पर गहन चिंतन किया। सायंकाल आयोजित पुस्तक-हस्ताक्षर सत्र में भी लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। ऑस्ट्रेलिया से आए एक प्रतिभागी ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से आचार्य प्रशांत के छात्र हैं, और हिंदी न जानने के बावजूद उन्होंने सभी सत्रों में पूरी तन्मयता से भाग लिया।

यह शिविर आत्मचिंतन और गहन संवाद का एक जीवंत मंच बना। प्रतिभागियों के उत्साह और व्यापक सहभागिता ने इसे हाल के वर्षों में ऋषिकेश के एक उल्लेखनीय आयोजन के रूप में स्थापित किया।

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