उत्तराखंड

*पहले सड़क बनेगी फिर पाइप लाइन के लिए खुदेगी*

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) - (मुकेश कबीर-विभूति फीचर्स) हमारे मोहल्ले में सीवेज लाइन का ब़ड़ा टोटा था इसलिए हम झुंड बनाकर म्युनिसिपलटी के ऑफिस में धमक…

देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) –

(मुकेश कबीर-विभूति फीचर्स)

हमारे मोहल्ले में सीवेज लाइन का ब़ड़ा टोटा था इसलिए हम झुंड बनाकर म्युनिसिपलटी के ऑफिस में धमक गए, एक दलाल के माध्यम से सबसे बड़े साब से मिले, क्योंकि वहां दलालों के बिना कुछ होता नहीं है l म्युनिसिपलटी में दलाल वैसे ही होते हैं जैसे हाथ ठेले में मजदूर, मतलब मजदूर जितना धक्का मारेगा ठेला उतना ही आगे बढ़ेगा और यदि कोई धकाने वाला नहीं है तो ठेला बिजली का खंबा बन जाएगा एक ही जगह खड़ा रहेगा। इसलिए हमने दलाल की मदद लेना ही बेहतर समझा, ताकि साब को खंबा बनने से रोक सकें। खैर जैसे तैसे हम साब के सामने पहुंचे और साब से विनती की “हुज़ूर हमारे मोहल्ले में सीवेज लाइन बहुत पुरानी हो चुकी है इसलिए कई तरह की दिक्कतें आती हैं यदि हुजूर की इनायत हो जाये तो मोहल्ले के लोगों की सुबह खुशनुमा हो जायेगी।”
आजकल साब लोगों को हुजूर ही बोलना पड़ता है। अब आपको तो पता ही है कि साब लोग खुद को बादशाह समझकर दीवाने आम में बैठते हैं। आजकल के साब लोग आम आदमी के सामने तो दमदार होते हैं लेकिन मंत्री जी के सामने दुमदार हो जाते हैं । खैर हम ठहरे आम आदमी, हमारे लिए तो साब के दलाल भी वजीर ए आज़म से कम नहीं इसलिए साब तो हुजूर होंगे हीं। खैर साब ने हमारी बात गौर से सुनी यह बड़ी मेहरबानी रही साब की,और उनके मोबाइल की भी, वर्ना यदि उसी वक़्त उनका मोबाइल कुछ अर्ज कर देता तो साब हमारी क्या सुनते? यदि बड़े ऑफिस से बड़े साब का फोन होता तो तुरंत उठकर चल देते हमें दलाल के भरोसे छोड़ जाते और यदि घर से मैडम का फोन होता तो भी साब हमारी नहीं सुनते,उनका पूरा टाइम् हाँ हाँ और ओके करने में निकल जाता ।
खैर साब बोले कि आप लोग नई सीवेज लाइन कहाँ डलवाना चाहते हैं ? हमने चौंककर कहा मोहल्ले में हुजूर और कहां ? फिर कुछ सोचकर साब बोले तुम्हारे मोहल्ले में सड़क पुरानी है या नई ? हमने कहा सर सड़क तो बहुत पुरानी है तो सुनकर साब बोले फिर हम सीवेज लाइन कैसे डाल सकते हैं ? हम पाइपलाइन वहीं डालते हैं जहां सड़क नई बनी होती है इसलिए पहले सड़क बनवाइये फिर आइए। हमने कहा हुजूर सड़क बनने के बाद पाइपलाइन डालना तो और मुश्किल होगा इसलिए आप अभी लाइन ड़लवा दीजिए फिर उसके ऊपर सड़क बन जायेगी तो दोनों काम सही हो जायेंगे । साब बोले अब सही ग़लत तुम हमें बताओगे ?तुम्हारे कहने से हम सालों पुरानी परंपरा तोड़ दें ? हमारे देश में परंपरा है पहले सड़क बनाई जाती है फिर उसे खोदकर पाइपलाइन बिछाई जाती है, जैसे तुम्हारी शर्ट के बीच में बटन की लाइन दिखाई देती है न वैसी ही सड़क पर दिखाई देना चाहिए, तभी तुम्हें समझ आता है कि नई पाइपलाइन डाली गई है, तभी हमारा काम तुम्हें दिखाई देगा इसलिए पहले सड़क बनवाईये फिर इधर आइए। हमने हाथ जोड़कर कहा जहांपनाह रहम करें, सड़क बनवाने के चक्कर में फिर साल दो साल निकल जायेंगे तब तक तो बहुत दिक्कत हो जायेगी और वैसे भी पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़क खोदने से हर जगह खुदा ही नज़र आता है और लोगों के गिरने पड़ने का डर भी रहता है इसलिए हम पहले ही आपके पास आ गए, यदि आप पाइप लाइन बिछा दें तो सड़क हम बाद में बनवा लेंगे l खैर इस बार साब ने कोई विरोध नहीं किया और बोले कि एप्लीकेशन दे जाइए मैं दिखवा लूँगा क्या हो सकता है l
हम तो एप्लिकेशन देकर आ गए और अब लाख टके का सवाल यही है कि पहले सड़क बनेगी या पहले पाइप लाइन डलेगी। हमारी तो यही विनती है भगवान से कि पहले पाइप लाइन ही बिछे, सड़क उसके बाद बने तो सबका भला होगा, अब देखते हैं साब लोग क्या करते हैं परंपरा तोड़ते हैं या सड़क, जस्ट वेट, तब तक थोड़ा इंतजार का मज़ा लीजिए …

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