ऋषिकेश

*ऋषिकेश -आदर्श गौशाला में धूमधाम से मनाया गयी गोपाष्टमी महोत्सव*

देवभूमि जे के न्यूज 20 नवंबर 2023 जानकी झूला के पास स्थित आदर्श गौशाला में आदर्श गौशाला के संस्थापक अध्यक्ष गुरु चरण मिश्रा ने आज सभी भक्तों के…

देवभूमि जे के न्यूज 20 नवंबर 2023 जानकी झूला के पास स्थित आदर्श गौशाला में आदर्श गौशाला के संस्थापक अध्यक्ष गुरु चरण मिश्रा ने आज सभी भक्तों के साथ गोपाष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर गुरु चरण मिश्रा जी ने उपस्थित लोगों को गोपाष्टमी के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि गोपाष्टमी का त्योहार जब भगवान श्री कृष्णा 6 वर्ष के थे तभी से मनाया जाता है।
कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी जिसके लिए गौ माता की सेवा की जाती है। इस दिन बछड़े सहित गाय का पूजन करने का विधान है। गौओं और उनके बछड़ो को भी स्नान कराया जाता है। गौ माता के अंगो में मेहंदी, रोली हल्दी आदि के थापे लगाये जाते हैं। गायों को संपूर्ण रूप से सजाया जाता है। फिर धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, रोली, गुड, जलेबी, वस्त्र और जल से गौ माता की पूजा की जाती है, आरती उतारी जाती है।

पूजन के बाद गौ ग्रास निकाला जाता है, गौ माता की परिक्रमा की जाती है, परिक्रमा के बाद गौओं के साथ कुछ दूर तक चला जाता है। कहते हैं ऎसा करने से प्रगत्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। इस दिन ग्वालों को उपहार देने की भी रस्म है। अपने सामर्थ्य अनुसार ग्वालों को उपहार दिया जाता है।

भगवान् ने जब छठे वर्ष की आयु में प्रवेश किया तब एक दिन भगवान् माता यशोदा से बोले – “मैय्या अब हम बड़े हो गए हैं”
मैय्या यशोदा बोली – “अच्छा लल्ला अब तुम बड़े हो गए हो तो बताओ अब क्या करें”
भगवान् ने कहा – “अब हम बछड़े चराने नहीं जाएंगे, अब हम गाय चराएंगे”
मैय्या ने कहा – “ठीक है बाबा से पूंछ लेना”मैय्या के इतना कहते ही झट से भगवान् नन्द बाबा से पूंछने पहुंच गए।

बाबा ने कहा– “लाला अभी तुम बहुत छोटे हो अभी तुम बछड़े ही चाराओं”
भगवान् ने कहा– “बाबा अब में बछड़े नहीं जाएंगे, गाय ही चराऊँगा ”
जब भगवान नहीं मने तब बाबा बोले- “ठीक है लाल तुम पंडत जी को बुला लाओ- वह गौ चारण का महुर्त देख कर बता देंगे”

बाबा की बात सुनकर भगवान् झट से पंडित जी के पास पहुंचे और बोले– “पंडित जी ! आपको बाबा ने बुलाया है, गौ चारण का महुर्त देखना है, आप आज ही का महुर्त बता देना में आपको बहुत सारा माखन दूंगा” पंडित जी नन्द बाबा के पास पहुंचे और बार-बार पंचांग देख कर गड़ना करने लगे तब नन्द बाबा ने पूंछा “पंडित जी के बात है ? आप बार-बार के गिन रहे हैं ?

पंडित जी बोले “क्या बताएं नन्दबाबा जी केवल आज का ही मुहुर्त निकल रहा है, इसके बाद तो एक वर्ष तक कोई मुहुर्त नहीं है” पंडित जी की बात सुन कर नंदबाबा ने भगवान् को गौ चारण की स्वीकृति दे दी। भगवान जी समय कोई कार्य करें वही शुभ-मुहुर्त बन जाता है।

उसी दिन भगवान ने गौ चारण आरम्भ किया और वह शुभ तिथि थी- “कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी” भगवान के गौ-चारण आरम्भ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई।

इस अवसर पर मुख्य रूप से दिलीप मिश्रा, रामनाथ मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद से भूमिका दीक्षित, लक्ष्मी दीक्षित, विजय दीक्षित ,उमेश शर्मा, विनीता शर्मा, अशोक शर्मा ,राजेश शर्मा, रंजन जैन, विजय गोपाल, राधा जैन, सोनी शर्मा, नीतिश चंद्र खंडूरी, कमलेश तिवारी सहित तमाम लोग उपस्थित थे।

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