धर्म-कर्म

*ईश्वर आश्रम में दिव्यता और भव्यता के साथ मनाई गई गोवर्धन पूजा*

देवभूमि जेके न्यूज ऋषिकेश 14 नवंबर 2023- आज पूरे देश में गोवर्धन पूजा की धूम रही, इसी कड़ी में ऋषिकेश में भी जगह-जगह गोवर्धन पूजा कर भगवान को…

देवभूमि जेके न्यूज ऋषिकेश 14 नवंबर 2023- आज पूरे देश में गोवर्धन पूजा की धूम रही, इसी कड़ी में ऋषिकेश में भी जगह-जगह गोवर्धन पूजा कर भगवान को छप्पन भोग लगाए गए। सभी आश्रमों में गोवर्धन पूजा के प्रति उत्साह देखने को मिला।
ऋषिकेश स्थित शीशम झाड़ी में ईश्वर आश्रम के संस्थापक एवं कृष्णायन देसी गौरक्षाशाला के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर ईश्वर दास जी महाराज द्वारा ईश्वर आश्रम में दिव्यता और भव्यता के साथ गोवर्धन पूजा की गई, जिसमें भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

महामंडलेश्वर ईश्वर दास जी महाराज ने गोवर्धन पूजा के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया ” मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं” कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की उपज होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहँकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के स्थान पर गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा आरम्भ कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियन्त्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।

इन्द्र निरन्तर सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे लगा कि उनका सामना करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं। ब्रह्मा जी के मुख से यह सुनकर इन्द्र अत्यन्त लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहँकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इस प्रकार भगवान ने इंद्रराज के अहंकार को चूर-चूर किया उसी दिन से यह गोवर्धन पूजा मनाई जाती है।

आयोजन में फलाहारी बाबा ईश्वर दास जी महाराज, पुजारी सर्वेश्वर दास जी महाराज, सुदर्शन दास जी, शंकारानंद जी महाराज, पवन दास, नरहरी दास, परमेश्वर दास ,बजरंग बाबा ,अजय गिरी महीसाणा से, गोपाल दास, श्याम दास अयोध्या से, भुवनेश्वर दास अयोध्या से, रघुनंदन भारद्वाज गाजियाबाद, सोनिया शर्मा ,डॉक्टर विशाखा भारद्वाज, पंडित आनंद स्वरूप, रमेश त्रिपाठी राष्ट्रीय हिंदू संगठन , योगीराज जी, मयंक राम राष्ट्रीय सनातन सेवा, पूरण पुंडीर, प्रदीप छोटू, कालू, प्रदीप पुंडीर ,अनिल शर्मा सहित तमाम भक्तगण उपस्थित थे।

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