ऋषिकेश

प्रेम किशोर नौटियाल और डॉक्टर इंदु भारद्वाज ने अपने प्रियजनों के निधन के पश्चात नेत्रदान।

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश,03/09/2024सनातन धर्म में एक प्राचीन मान्यता प्रचलित रही है कि यदि मृत्यु के पश्चात शरीर में किसी प्रकार की चीरफाड़ की जाए तो…

देव भूमि जे के न्यूज ऋषिकेश,03/09/2024सनातन धर्म में एक प्राचीन मान्यता प्रचलित रही है कि यदि मृत्यु के पश्चात शरीर में किसी प्रकार की चीरफाड़ की जाए तो मोक्ष की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर, वैज्ञानिक और चिकित्सक इस तथ्य पर जोर देते हैं कि विश्व में कॉर्नियल अंधत्व को समाप्त करने के लिए बड़ी संख्या में कॉर्निया की आवश्यकता होती है। इस अंधविश्वास को समाप्त करने और समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चिकित्सक भी आगे आ रहे हैं।

हाल ही में, प्रेम किशोर नौटियाल और डॉक्टर इंदु भारद्वाज ने अपने प्रियजनों के निधन के पश्चात नेत्रदान कर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन डॉक्टर प्रकाश चंद नौटियाल का निधन हो गया था। उनके पड़ोसी गीतु पाहवा द्वारा प्रेरित किए जाने पर उनके पुत्र प्रेम किशोर नौटियाल, जो नेत्रदान के महत्व को भली-भांति समझते थे, ने तुरंत नेत्रदान का निर्णय लेकर सहमति प्रदान की।

दूसरी ओर, डॉक्टर इंदु भारद्वाज की माता श्रीमती प्रमिला जोशी का भी हाल ही में निधन हो गया। उनके निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे दीप सुनेजा ने डॉक्टर आर. के. भारद्वाज से नेत्रदान का आग्रह किया। सुनेजा जी की प्रेरणा से डॉक्टर भारद्वाज ने नेत्रदान के लिए स्वीकृति दी और तत्पश्चात श्री नारंग को इस बारे में सूचित किया।

श्री नारंग के आग्रह पर ऋषिकेश आई बैंक एम्स अस्पताल की नेत्रदान रेस्क्यू टीम ने समय पर पहुँचकर दोनों कॉर्निया को सुरक्षित रूप से प्राप्त कर लिया। लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के जनसंपर्क अधिकारी मनमोहन भोला ने बताया कि यह मिशन का 356वां सफल प्रयास है, जिससे अब तक 712 व्यक्तियों को दृष्टि प्राप्त हो चुकी है।

नेत्रदान एक महान कार्य है जो न केवल किसी अंधकारमय जीवन को पुनः प्रकाशित करता है, बल्कि समाज में मानवीयता, संवेदनशीलता और जागरूकता का भी प्रसार करता है। ऐसे उदाहरण समाज को अंधविश्वासों से मुक्त कर वैज्ञानिक और तार्किक सोच की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। नेत्रदान की यह पहल वास्तव में सराहनीय और अनुकरणीय है।

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