उत्तराखंड

*स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट ने बनाया स्ट्रेपलेस फेसमास्क, मिला पेटेंट*

देव भूमि जे के न्यूज 18-MAR-2024-डोईवाला- स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट ने नई खोजों (अविष्कार) के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों…

देव भूमि जे के न्यूज 18-MAR-2024-डोईवाला- स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट ने नई खोजों (अविष्कार) के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्ट्रेपलेस (बिना पट्टी का) फेसमास्क का अविष्कार किया है। इससे हेल्थ इंडस्ट्री से जुड़े चिकित्सकों, नर्सेज, पैरामेडिकल सहित विभिन्न जरूरतमंद लोगों के लिए मास्क लगाने में राहत मिलेगी। विश्विविद्यालय के अध्यक्ष डॉ.विजय धस्माना व कुलपति डॉ.राजेंद्र डोभाल ने वैज्ञानिकों को इस कामयाबी के लिए बधाई दी है।

कोविड 19 संकट के दौरान, फेसमास्क पहनना संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए एक अनिवार्य सावधानी बन गया था। औसतन, लोगों को प्रति दिन 10 से 12 घंटे तक मास्क पहनना पड़ रहा था। आम तौर पर बाजार से मिलने वाले हर मास्क में पट्टियों की व्यवस्था होती थी। यह बेहद असुविधाजनक होता था। इन्हीं परेशानियों के निराकरण के लिए स्वामी राम हिमालयन विश्विद्लयों के वैज्ञानिकों की टीम ने काम करना शुरू किया और स्ट्रेपलेस फेसमास्क का अविष्कार किया। भारत सरकार ने इस अविष्कार का पेटेंट स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट के नाम दर्ज कर लिया है।

*ऐसे बना है यह फेसमास्क*
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट में आईपीआर सेल के इंचार्ज प्रो.योगेंद्र सिंह ने बताया स्ट्रेपलेस फेस मास्क दो परतों की फैब्रिक संरचना से बना है, जो एक-दूसरे से अलग होती है। इसे वायरस, बैक्टीरिया और धूल जैसे संक्रामक तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। फैब्रिक की दो परतों के बीच एक धातु की तार (जिसे स्प्रिंग स्टील, एलॉय स्टील, कार्बन स्टील कोबाल्ट-निकेल, कॉपर बेस में से चुना जा सकता है) रखी गई है। मेटालिक तार के कारण मास्क को दिया गया संरचनात्मक स्थिरता बेहतर फिटिंग प्रदान करती है, इससे मास्क में पट्टी (स्ट्रैप) की जरूरत नहीं पड़ती।

*वर्तमान आविष्कार के लाभ*
यह हल्के वजन वाले बिना पट्टी के सामग्री (पॉलिएस्टर) से बना है। यह चेहरे को कसकर फिट बैठता है क्योंकि इसमें पहनने वाले की चेहरे की संरचना के साथ कस जाता है। यह चेहरे पर चोट नहीं पहुंचाता। इसे धोकर दोबारा इस्तेमार कर सकते हैं। लंबी अवधि के उपयोग के लिए यह अधिक सुविधाजनक होगा।

“शोध व अविष्कार के क्षेत्र में गौरवशाली विरासत रही है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने यह कामयाबी दर्ज की है। डॉ.धस्माना ने इस अविष्कार से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम को बधाई व शुभकामनाएं दी। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह अविष्कार मानव जाति के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। डॉ.धस्माना ने कहा कि विश्वविद्यालय का फोकस शोध कार्यों पर है”- *डॉ.विजय धस्माना, अध्यक्ष, स्वामी राम हिमालयन विश्वविदयालय, जौलीग्रांट*

“मैं पूरी टीम पर गर्व करता हूँ। मैं उनकी निरंतर सफलता की कामना करता हूँ। विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में कई नए आविष्कारों पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हैं। जल्द ही कुछ और खोजों में कामयाबी मिलने की उम्मीद है। – डॉ.राजेंद्र डोभाल, कुलपति, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट*

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