देवभूमि जे के न्यूज़-(जय कुमार तिवारी) – 11-May-2026 डोईवाला- हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के बाल रोग एवं नवजात विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रव्यापी नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी) दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बेसिक एनआरपी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 40 स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसआरएचयू के प्रति कुलपति डाॅ. अशोक कुमार देवरारी ने कहा कि उत्तराखंड में नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक और समयबद्ध प्रशिक्षण देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता से जन्म के बाद होने वाली जटिल परिस्थितियों में नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। डॉ. रुचिरा नौटियाल ने कहा कि नवजात शिशु की सुरक्षित देखभाल के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों, बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।
एनएनएफ की राज्य अध्यक्ष डाॅ. अल्पा गुप्ता व समन्वयक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम उत्तराखंड शाखा की पहल पर आयोजित की गयी। इसमें इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, यूनिसेफ, फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया तथा ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया का सहयोग रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के बाद के पहले 60 सेकंड यानी “गोल्डन मिनट” नवजात शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय सही और त्वरित उपचार मिलने से नवजात की जान बचाई जा सकती है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उत्तराखंड में नवजात मृत्यु दर को वर्तमान प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 17 मृत्यु से घटाकर एकल अंक तक लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य तभी संभव है, जब अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर पुनर्जीवन संबंधी प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। कार्यशाला का नेतृत्व लीड इंस्ट्रक्टर डॉ. सनोबर वासिम ने किया। कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. नीरुल पंडिता, डॉ. सोनम अग्रवाल और डॉ. नितिका ने प्रतिभागियों को नवजात पुनर्जीवन की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
