*आयुर्वेदाचार्य डॉ. डी.के. श्रीवास्तव का अमेरिका में आधुनिक और प्राचीन चिकित्सा के समायोजन पर विशेष व्याख्यान एवं वर्कशॉप*

देवभूमि जे के न्यूज़-

ऋषिकेश | दिनांक: 4-5 2026

ऋषिकेश के आयुर्वेदाचार्य डॉ. डी.के. श्रीवास्तव को अमेरिका में आधुनिक और प्राचीन चिकित्सा के समायोजन पर विशेष व्याख्यान एवं वर्कशॉप…

विश्व प्रसिद्ध योगनगरी ऋषिकेश के वरिष्ठ एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. डी.के. श्रीवास्तव को संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक एवं समग्र स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर वे “लाइफस्टाइल डिज़ीज़ में आयुर्वेद की भूमिका” तथा “आधुनिक विज्ञान एवं प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान का समन्वय” जैसे समसामयिक और वैश्विक महत्व के विषयों पर व्याख्यान एवं वर्कशॉप आयोजित करेंगे।
डॉ. श्रीवास्तव विगत कई वर्षों से यूरोप के विभिन्न देशों में आयुर्वेद पर आधारित सफल अंतर्राष्ट्रीय कार्यशालाओं का संचालन करते रहे हैं। नाड़ी परीक्षण, जीवनशैली रोगों की गहन आयुर्वेदिक व्याख्या, समग्र स्वास्थ्य अवधारणा तथा विज्ञान-सम्मत आयुर्वेदिक दृष्टिकोण उनकी पहचान रही है, जिसे वैश्विक मंचों पर विशेष सराहना मिली है।
अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान डॉ. श्रीवास्तव 5 मई 2026 से 18 मई 2026 तक न्यूयॉर्क एवं न्यू जर्सी में प्रवास करेंगे। इस अवधि में उनके द्वारा

* विशेष आयुर्वेदिक वर्कशॉप्स,
* स्वास्थ्य एवं जीवनशैली पर केंद्रित मीडिया इंटरव्यू, तथा
* अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पॉडकास्ट संवाद
आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों—जैसे मधुमेह, मोटापा, तनाव, हृदय रोग एवं मानसिक असंतुलन—में आयुर्वेद की वैज्ञानिक, व्यवहारिक और स्थायी उपयोगिता को वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करना है, साथ ही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच सार्थक संवाद को सशक्त बनाना भी है।
इस अवसर पर डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि “आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की वैज्ञानिक जीवन-दृष्टि है। आज जब पूरा विश्व जीवनशैली रोगों से जूझ रहा है, तब आयुर्वेद संतुलन, स्वास्थ्य और दीर्घायु का मार्ग प्रशस्त करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान के समन्वय से ही भविष्य की समग्र एवं टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणाली विकसित हो सकती है। आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा—तीनों के सामंजस्य पर आधारित है।”

डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी स्पष्ट किया कि “विश्व को आज दवाओं से अधिक जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है। आयुर्वेद रोगों को केवल दबाता नहीं, बल्कि उनकी जड़ को समझकर स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करता है—यही इसकी वैश्विक प्रासंगिकता है।”

अपनी यात्रा को लेकर उन्होंने कहा, “यह यात्रा मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय आयुर्वेद, संस्कृति और भारत की स्वास्थ्य-दृष्टि को वैश्विक मंच पर सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का अवसर है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना ही आयुर्वेद का मूल संदेश है।”

डॉ. डी.के. श्रीवास्तव की यह अंतर्राष्ट्रीय यात्रा भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा की वैश्विक प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा विश्व स्वास्थ्य विमर्श में भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को नई पहचान और दिशा प्रदान करेगी।

Static 1 Static 1 Static 1 Static 1 Static 2 Static 3 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4 Static 4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *